किसान आंदोलन के समर्थन में टीकरी बॉर्डर के लिए हांसी की ऐतिहासिक लाल सड़क से किसानों की पदयात्रा को शहीद भगत सिंह की भांजी गुरजीत कौर ने झंडी दिखाकर रवाना किया। गुरजीत कौर ने कहा कि सरकार द्वारा विरोधी आवाजों को देशद्रोही कहने से शहीदों के परिवारों को दर्द होता है। विरोधी आवाजों को दबाने का प्रचलन और भ्रष्टाचार का बीज तो कांग्रेस ने ही देश में बोया था, लेकिन वर्तमान सरकार ने लोकतंत्र में विरोधी आवाज को दबाने के लिए सारी हदों को पार कर दिया है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद जिन लोगों के हाथ में सत्ता आई वे बेईमान निकले।
उन्होंने कहा कि आजादी के लिए लड़ने वाले लोग, देश आजाद होने के बाद बैठ गए, क्योंकि उन्होंने सोचा कि उनका काम पूरा हो गया है और जो लोग देश को चलाने के लिए सत्ता में आए वे बेईमान निकले। किसी भी सरकार ने जनता के बारे में नहीं सोचा। केवल सत्ता पाने की जुगत में लगी रहीं। उन्होंने कहा कि 23 मार्च के बाद से किसान आंदोलन और तेज होगा। 26 मार्च को देशव्यापी बंद का बड़ा असर देखने को मिलेगा। शहीद स्मारक पर आयोजित जनसभा को संयुक्त किसान मोर्चा के नेता डॉ. अशोक धवले, इंद्रजीत सिंह, सुरेंद्र यादव, खेत मजदूर यूनियन के संयुक्त सचिव डॉ. विक्रम सिंह, रामकुमार, जयभगवान, सुमित कुमार, शमशेर नंबरदार, धर्मवीर फौजी, मेजर सिंह, जगतार सिंह, सुखदेव सिंह, कुलदीप खरड़, राजेश कासनिया, कैलाश मंडावरिया, नरेंद्र सहरावत, दलीप खोखर, प्रहलाद, अजीत धनाना, विकास सिसर आदि ने संबोधित किया।
23 मार्च को पहुंचेंगे टीकरी बॉर्डर
हरियाणा, पंजाब व उत्तरप्रदेश के किसानों व मजदूरों द्वारा शहीदी दिवस पर जगह-जगह पदयात्रा निकाली जा रही है, जो शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के शहीदी दिवस के दिन 23 मार्च को टीकरी बॉर्डर पर पहुंचेगी। यह पदयात्रा पंजाब के खटकड़ कलां से शुरू होकर हांसी पहुंची थी। हांसी से सैकड़ों किसान, मजदूर, छात्र व अन्य लोग पदयात्रा को समर्थन देते हुए उसमें शामिल हुए।
संघर्ष और बलिदान की प्रतीक है लाल सड़क
किसानों ने कहा कि हांसी की यह सड़क शहीदों के खून से लाल हो गई थी और आज भी इसे लाल सड़क के नाम से जाना जाता है। यह सड़क संघर्ष और बलिदान का प्रतीक है। 1857 की बगावत के दौरान हांसी, हिसार और सिरसा में ईस्ट इंडिया कंपनी की बटालियन रोहनात से बागियों को हटाने के और मिटाने के लिए भेजी गई थी। जिन बागियों को पकड़ा गया, उन्हें हांसी लाकर रोड रोलर के नीचे कुचल दिया गया, इसलिए इस पद यात्रा को शहीद स्मारक से रवाना किया जा रहा है।