हिसार। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर खुद को सरकारी शिक्षक बताकर बैंक से कार लोन लेने के मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश मंगलेश चौबे की अदालत ने वीरवार को दोषी परमजीत को 3 साल की सजा सुनाई है। अदालत ने उसकी अपील खारिज करते हुए सजा में संशोधन किया। इससे पहले निचली अदालत ने उसे 5 साल की सजा सुनाई थी।
यह मामला 2013 का है जब स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के तत्कालीन ब्रांच मैनेजर की शिकायत पर सिटी थाना पुलिस ने केस दर्ज किया था। शिकायत के मुताबिक आरोपी परमजीत ने खुद को सरकारी शिक्षक बताकर करीब 3.40 लाख रुपये का कार लोन लिया था। इसके लिए उसने राशन कार्ड, सैलरी सर्टिफिकेट और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज बैंक में जमा किए थे।
जांच में सामने आया कि दिए गए सभी दस्तावेज फर्जी थे। आरोपी ने हिसार के सिरसा रोड स्थित हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी का पता और 37 हजार रुपये मासिक आय दर्शाई थी। जब लोन की किस्तें जमा नहीं हुईं, तो बैंक ने जांच शुरू की और पता चला कि आरोपी न तो वहां रहता था और न ही शिक्षक था। इस मामले में पुलिस ने परमजीत और दिलबाग सिंह को गिरफ्तार किया था। 7 मार्च 2019 को सीजेएम अदालत ने दोनों को दोषी ठहराया था, लेकिन सह-आरोपी दिलबाग सिंह को 22 जनवरी 2026 को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया।