फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गांव धांसू में सुशीला बनेगी एक दिन की सरपंच

Sun, 14 Aug 2016 12:47 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हिसार
विज्ञापन
गांव धांसू - फोटो : bureau
विज्ञापन
नायक फिल्म की तर्ज पर एक बेटी को एक दिन का सरपंच बनाया जाएगा। गांव धांसू में एक दिन की सरपंच के लिए 12वीं पास तीन टॉपर्स लड़कियों ने दावा किया था। मामला बढ़ने पर पंचायत को दखल देना पड़ा और शनिवार को पंचायत बुलाई गई।शाम तक चली पंचायत ने फैसला लिया कि सरकारी स्कूल में पढ़कर 12वीं कक्षा में सबसे अधिक अंक लेने वाली बेटी सुशीला खटोड़ 15 अगस्त के दिन गांव की सरपंच रहेगी।
विज्ञापन


सरकारी स्कूूलों को बढ़ावा देने के लिए चुना सुशीला को
गांव धांसू के सरपंच मनोहर लाल ने बताया कि गांव में सरकारी स्कूलों के विकास के लिए सुशीला खटोड़ को एक दिन के लिए सरपंच बनाया गया है। सुशीला ने पहली कक्षा से 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई सरकारी स्कूल में ही की है।

इसी बात को देखते हुए पंचायत और ग्रामीणों ने सुशीला खटोड़ को एक दिन का सरपंच बनाने का फैसला लिया है। हालांकि निजी स्कूलों से 12वीं पास करने वाली आरती सैनी, कविता खिलेरी के सुशीला से अधिक अंक हैं, लेकिन सुशीला के सरकारी स्कूल में पढ़ते हुए भी 81 प्रतिशत अंक प्राप्त करने पर ग्रामीणों द्वारा सर्वसम्मति से चुना गया।
विज्ञापन


15 अगस्त को फहराएंगी तिरंगा
एक दिन के लिए सरपंच चुने जाने पर बनी सहमति के बाद सुशीला स्वतंत्रता दिवस पर गांव के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में तिरंगा फहराएंगी, उसके बाद सरपंच संबंधी काम करेगी।

गांव में स्कूल की दशा सुधारने को देंगी प्राथमिकता
सुशीला खटोड़ से ये पूछने पर कि एक दिन की सरपंच बनने पर उसकी क्या प्राथमिकताएं रहेंगी तो उसने बताया कि गांव के जिस राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में वह बचपन से पढ़ी है, उस स्कूल की दशा सुधारने के लिए प्रयास करेगी।

सुशीला ने कहा कि इस स्कूल की इमारत काफी पुरानी हो गई है। स्कूल में छात्रों के लिए कमरों की भी कमी है। इन कमियों को दूर करने का प्रयास करूंगी और साथ ही स्कूल में पानी, बाथरूम की सुविधाओं को बढ़ावा देंगी। ग्रामीणों को लड़कियों को पढ़ाने के लिए भी जागरूक करूंगी।

गांवों में बसों की समस्या करूंगी दूर
सुशीला ने बताया कि गांव में बसों की काफी समस्या है, जिस कारण गांव की लड़कियां जो बीए, बीकॉम आदि करने के लिए शहर के कॉलेजों में जाती हैं। उन्हें आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। क्योंकि गांव में पांच गांवों की एक ही बस आती है।

इस कारण इस बस में भीड़ के कारण लड़कियों को कॉलेजों में जाने के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहीं गांव में स्टेडियम की दशा सुधारने की बात भी सुशीला ने कही है।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें