हिसार। जिला नागरिक अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट बनाए जाने को लेकर मशीन और टैंक के रखरखाव के लिए व्यवस्था बना दी गई है। अब केवल ऑक्सीजन बनाने वाली मशीन आने की देरी है। इसके बाद अस्पताल प्रशासन को बाहर से ऑक्सीजन नहीं खरीदनी पड़ेगी, बल्कि जिला अस्पताल ऑक्सीजन बनाने के मामले में आत्मनिर्भर होगा।
प्रशासन के इस प्रयास से ऑक्सीजन खरीदने से लेकर खर्च एवं समय की भी बचत होगी। अभी अस्पताल प्रबंधन को 15 से 20 सिलिंडर प्रतिदिन खरीदने पड़ते हैं। वहीं, कोरोना के मरीज जब अधिक थे उस समय तो 80 से 90 सिलिंडर की प्रतिदिन खपत होती थी। कई बार ऑक्सीजन के अभाव में मरीजों को रेफर भी करना पड़ता था। प्लांट चालू होने के बाद अस्पताल में बार-बार ऑक्सीजन सिलिंडर को भी बदलने से छुटकारा मिलेगा, क्योंकि पूरे अस्पताल में पाइपलाइन से ही ऑक्सीजन की आपूर्ति की जा सकेगी।
डीजी हेल्थ ने दिए थे निर्देश
पिछले दिनों उच्च स्वास्थ्य विभाग की तरफ से डीजी डॉ. जेएस ग्रेवाल ने नागरिक अस्पताल का दौरा किया था। उस दौरान उन्होंने अस्पताल में खुद का ऑक्सीजन प्लांट बनाए जाने को लेकर निर्देश दिए थे, ताकि आपातकालीन स्थिति में भी इस्तेमाल किया जा सके। उसके बाद से प्लांट लगाने के प्रयास शुरू हुए, जो अब बनकर तैयार हो गया है।
खाली जगह का सदुपयोग
यह ऑक्सीजन प्लांट पीपीसी कार्यालय के नजदीक आइसोलेशन वार्ड के सामने पड़ी खाली जगह पर बनाया गया है और वहीं से अस्पताल में सभी जगह आपूर्ति होगी। इसके चलते इस खाली जगह का भी सही तरह से इस्तेमाल हो सका है। यह खाली जगह बेकार पड़ी थी, जहां पर केवल बंदरों का जमावड़ा रहता था।
स्वचालित होगा सिस्टम
अस्पताल प्रशासन द्वारा एक ही जगह पर व्यवस्था की गई है। यहीं पर मशीन रखी जाएगी, जो खुले में ऑक्सीजन को बनाने का काम करेगी। इसी के साथ ऑक्सीजन को स्टोरेज करने के लिए टैंक एवं सप्लाई की व्यवस्था भी यहीं होगी। प्लांट बनने से यह सारी प्रक्रिया स्वचालित (ऑटोमेटिक) रहेगी। इस वजह से अधिक कर्मचारियों की भी आवश्यकता नहीं पड़ेगी। वहीं, सिलिंडर खत्म होने पर बार-बार बदलने पड़ता है और अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती करनी पड़ती है।
एक ऑक्सीजन सिलिंडर 200 से 250 रुपये में भरता है
बाजार में एक ऑक्सीजन सिलिंडर भरवाने के लिए 200 से 250 रुपये लगते हैं। ऑक्सीजन सिलिंडर बाजार में खरीदारी पर नहीं मिलता है, बल्कि किराये पर लेना पड़ता है और एक बड़ा सिलिंडर लेने पर 8 हजार रुपये और छोटा सिलिंडर लेने पर 5 हजार रुपये एडवांस जमा कराने पड़ते हैं। इसके अलावा ऑक्सीजन सिलिंडर को भरवाने के लिए लाने व ले जाने में अधिक कर्मचारियों की आवश्यकता पड़ती है और काफी समय भी लगता है। प्लांट चालू होने के बाद ऐसा नहीं करना पड़ेगा।
आत्मनिर्भर होगा अस्पताल
शहर का नागरिक अस्पताल ऑक्सीजन पैदा करने के मामले में जिले की सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं में इकलौता आत्मनिर्भर अस्पताल होगा। ऐसी सुविधा अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में भी नहीं है। जिले के जिंदल अस्पताल जैसे इक्का-दुक्का बड़े निजी अस्पतालों में ही ऑक्सीजन बनाने की व्यवस्था है।
पहले सरकार ने किया था सर्वे
एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. आशीष राणा ने बताया कि भारत सरकार ने कोरोना के चलते सभी जगह सर्वे किया था। इसके बाद अस्पताल में मरीजों की संख्या और ऑक्सीजन खपत को देखते हुए हिसार नागरिक अस्पताल को यह ऑक्सीजन प्लांट लगाने की इजाजत मिली थी। अब जल्द ही मशीन मिल जाएगी, जिससे मरीजों को सहूलियत मिलेगी। इस तरह हरियाणा राज्य के चार से पांच अन्य जिलों में भी ऑक्सीजन प्लांट बनाए जाने को लेकर तैयारियां की जा रही हैं।
अब मशीन आना बाकी
हमारी ओर से ऑक्सीजन प्लांट को लेकर व्यवस्था बना दी गई है। अब केवल मशीन आना बाकी है, जो ऑक्सीजन बनाएगी। बेहद खुशी है कि हमारा अस्पताल ऑक्सीजन बनाने को लेकर आत्मनिर्भर बनेगा। हमारी ओर से मरीजों की सहूलियत के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
-डॉ. गोविंद गुप्ता, पीएमओ, नागरिक अस्पताल, हिसार।