हिसार। एचएयू के इंदिरा गांधी सभागार में रविवार सुबह आयोजित सरपंच, पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों के साथ संवाद कार्यक्रम का कुछ सरपंचों ने विरोध किया। वे ई-टेंडरिंग का विरोध कर रहे थे। एक घंटे तक हंगामा चला। सभागार का दरवाजा न खोलने पर पुलिस और सरपंचों के बीच गहमा-गहमी भी हुई। जब मंत्री कार्यक्रम के बाहर निकले तो सरपंचों ने उनके सामने सरकार मुर्दाबाद के नारे लगाए। सरपंचों ने कहा कि नहीं चलेगी, नहीं चलेगी... तानाशाही नहीं चलेगी। हालांकि पुलिस ने उन्हें रोक लिया। उन्होंने कहा कि हम पर विश्वास नहीं है तो ठेकेदार क्या ईमानदारी से काम करेगा। मंत्री के जाने के बाद सरपंचों ने निर्णय लिया कि वे 22 दिसंबर को उपायुक्त को ज्ञापन सौंपेंगे। इससे पहले जिले के सभी नौ ब्लॉक में कमेटी का गठन किया जाएगा।
सुबह करीब साढ़े 10 बजे विकास एवं पंचायत मंत्री देवेंद्र बबली संवाद कार्यक्रम में पहुंचे। इनके आने के बाद एक सरपंच ने खड़े होकर ई-टेंडरिंग का विरोध जताते हुए सरपंचों और उनके प्रतिनिधियों को सभागार से बाहर जाने के लिए कहा। इसके बाद 50 से अधिक सरपंच और प्रतिनिधि उठकर बाहर चले गए। धीरे-धीरे सरपंचों की संख्या बढ़ती गई। फिर नारेबाजी करते हुए सभागार के अंदर जाने लगे तो पुलिस ने दोनों तरफ के गेट बंद कर दिए। सरपंचों ने गेट के बाहर नारेबाजी शुरू कर हंगामा कर दिया। डीएसपी कप्तान सिंह ने समझाने का प्रयास किया, लेकिन उनकी एक न सुनी। करीब एक घंटे तक ऐसे ही चलता रहा। कभी सरपंच अंदर तो कभी बाहर नारेबाजी करते रहे।
विकास कार्य के लिए मिलते थे 20 लाख
सुलचानी के सरपंच मंजीत, डाबड़ा के सूर्यदीप, फरीदपुर के चांदीराम, पेटवाड़ के जगबीर सिंह, गंगवा के भगवान दास, मुकलान के राजेश, भेरिया के लीलूराम, पुट्ठी समैन के धर्मराज, बालावास की सीमा, तलवंडी बादशाहपुर की पिंकी रानी, ढाणी मोहब्बतपुर की कविता, मोहब्बतपुर की ऊषा, ढाणी केंदू की निर्मला, बयानाखेड़ा के कृष्ण कुमार, पनिहार के सरपंच प्रतिनिधि शमशेर ने बताया कि पहले गांव के विकास कार्य के लिए सरपंच के पास 20 लाख रुपये तक खर्च करने की पावर होती थी। अब सरकार ने इसे घटा कर एक लाख रुपये कर दिया है। इसके ऊपर गांव में विकास कार्य करवाने के लिए ई-टेंडरिंग करनी होगी। ठेकेदार गांव में काम करवाएगा। सरपंचों का कहना है कि सरकार कहती है कि भ्रष्टाचार रोकने के लिए ई-टेंडरिंग के जरिये विकास कार्य करवाए जाएंगे। सरकार बताए कि ठेकेदार कोई भ्रष्टाचार नहीं करेगा। उनका कहना है कि हमारी मांग है तो विकास कार्य के लिए सरपंचों को पहले की तरह पावर दी जाए।
विकास कार्य नहीं होंगे तो जनता वोट क्यों देगी
प्रदर्शनकारी सरपंचों का कहना है कि वे गांव मे विकास कार्य करवाने के लिए लोगों के बीच जाकर वोट मांगे थे। अब सरपंच के पास विकास कार्य करवाने की पावर नहीं होगी तो वे विकास कार्य नहीं करवा पाएंगे। सरकार कह रही है कि ई-टेंडरिंग के जरिए विकास कार्य करवाए जाएंगे। टेंडर लगाने के लिए अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ेंगे। उसके बाद ठेकेदार ने काम में घटिया सामग्री लगाई तो ग्रामीण सरपंच को जिम्मेदार ठहराएंगे। ऐसे में गांव का माहौल खराब होगा।
प्रदेश में भाजपा सरकार बनते ही घटा दी थी पावर
सरपंचों का कहना है कि प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद जब 2016 में सरपंच चुने गए तो सरकार ने सरपंच की विकास कार्य करने के लिए पावर घटा दी थी। सरपंचों ने प्रदेशभर में प्रदर्शन किया था तो 20 लाख रुपये तक विकास कार्य करवाने की पावर दी थी। अब फिर से सरपंच चुने गए हैं तो एक लाख रुपये की पावर दी है।
हिसार। जनप्रतिनिधि संवाद कार्यक्रम में सभागार में जाने से रोकने पर नारेबाजी करते सरपंच।- फोटो : Hisar
हिसार। सरपंच को अंदर जाने से रोकता पुलिस कर्मचारी।- फोटो : Hisar