हिसार में तहसीलदार ने रजिस्ट्री के समय पार्षदों की गवाही को अनिवार्य कर दिया है। पार्षदों ने तहसीलदार के इस फैसले का विरोध किया है। इसे लेकर पार्षदों में मंगलवार को उपायुक्त को ज्ञापन भी सौंपा। उपायुक्त को सौंपा गया ज्ञापन में पार्षदों ने बताया कि शहर में तहसीलदार ने 7 अगस्त से रजिस्ट्री के समय पार्षद की गवाही जरुरी कर दी है, जो सरासर गलत है। साथ ही इन्तकाल के समय भी पार्षद की गवाही जरुरी कर दी है। सभी पार्षद इसका विरोध करते हैं।
पार्षद बोले-ऐसे तो सारा दिन तहसील कार्यालय में ही बैठना पड़ेगा
आज से पहले रजिस्ट्री के समय वकीलों की गवाही भी मान्य थी, लेकिन तहसीलदार ने इसे अमान्य कर दिया गया है। इन्तकाल के समय भी पार्षद की रिपोर्ट पर ही इन्तकाल दर्ज हो जाता था। फोटो खिंचवाने की जरुरत नहीं होती है। नए फैसले से पार्षदों का सारा समय तहसील में ही लग जाएगा और पार्षद विकास के अन्य कार्य नहीं करवा सकेंगे। उनकी मांग है कि रजिस्ट्री के समय नम्बरदार व वकीलों की गवाही की जाए, जैसा कि पहले काफी समय से ऐसा चल रहा है।
रजिस्ट्री के समय पार्षदों को ना बुलाया जाए। साथ ही विरासत के इन्तकाल के समय फोटो के लिए पार्षद को ना बुलाया जाए और रिपोर्ट पर ही इन्तकाल किया जाए। इस अवसर पर सीनियर डिप्टी मेयर अनिल सैनी, पार्षद अनिल जैन, डॉ उमेश खन्ना, मनोहर लाल, भूप सिंह रोहिल्ला, जगमोहन मित्तल, अमित ग्रोवर, प्रीतम सैनी, पिंकी शर्मा, मनोनीत पार्षद सतीश सुरलिया, पार्षद प्रतिनिधि प्रवीण केडिया, पंकज दीवान, सुशील शर्मा, राजकुमार मौजूद रहे।