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बैगन के पौधे पर टमाटर तो हरी मिर्च के साथ लगेगी शिमला मिर्च

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हिसार। बढ़ती आबादी व घटते संसाधनों के बीच सामंजस्य बैठाने के लिए वैज्ञानिकों ने भी अजब-गजब रिसर्च शुरू किया है। एचएयू की पौधशाला में ऐसे पौधे तैयार हो रहे हैं, जिससे एक ही गमले में कई प्रकार की सब्जियां मिल सकें। दो दिवसीय कृषि मेला में बैगन के पौधे पर टमाटर व हरी मिर्च पर शिमला मिर्च लगने वाले पौधे खूब बिके। इन पौधों को ग्राफ्टिंग विधि से तैयार किया जा रहा है।
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यह होती है ग्राफ्टिंग विधि
एक ही पौधे में दो या अधिक तरह की सब्जी या फल-फूल उगाने की तकनीक ग्राफ्टिंग विधि कहलाती है। इसे सामान्य भाषा में कलम बांधना भी कहा जाता है। एक पौधे की डालियों के साथ उससे मिलती-जुलती प्रजाति के दूसरे पौधे की क्रॉस कलम बांधना। ग्राफ्टिंग तकनीक का इस्तेमाल कुछ वर्ष पहले ही शुरू हुआ है। वैज्ञानिकों का मानना है कि किसानों को इस तकनीक से बहुत फायदा होगा। खासकर किचन गार्डन में इसका प्रयोग बहुत लाभकारी हो सकता है।
भिंडी के रंग, धनिया की महक से चौंके किसान
किसान मेले में प्रदर्शनी के लिए रखे गए बीजों के नाम, रंग व गुण भी कम रोचक नहीं रहे। लाल भिंडी व लोबिया ने जहां किसानों को आकर्षित किया तो वहीं धनिया व मेथी के बीजों के नाम से लोग अचंभित रहे। हिसार नवीन, हिसार मनोहर, हिसार सोनाली, हिसार सुगंधा और हिसार आनंद आदि के नाम सुनते ही किसान गुण-दोष की चर्चा शुरू कर दे रहे थे।
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एचएयू के सब्जी विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. टीपी मलिक ने बताया कि एचएयू की तरफ से किसानों के फायदे के लिए सब्जी व मसाले की तमाम ऐसी प्रजातियों का विकास किया गया है, जिससे वे अपने खाने के अलावा व्यावसायिक तौर पर भी इनका उत्पादन कर सकते हैं।
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