अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने दो मार्च को दिल्ली कूच का एलान कर दिया है। 26 फरवरी को काला दिवस मनाने के दिन ही दिल्ली संसद भवन कूच के लिए ड्यूटी तय कर दी जाएंगी। वक्ताओं ने कहा कि धरनों को अगर साल भर भी चलाना पडे़ तो जाट समाज पीछे नहीं हटेगा।
अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक शुक्रवार को रोहतक के जसिया में हुई। इन फैसलों की जानकारी मीटिंग में शामिल होने गए पदाधिकारी शनिवार को धरना स्थल पर लोगों को बताएंगे। बैठक में फैसला लिया गया कि प्रदेश सरकार की अधिकारियों की कमेटी से अब बातचीत नहीं होगी। प्रदेश प्रवक्ता रामभगत मलिक ने बताया कि जसिया में समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक के नेतृत्व में कई अहम फैसले लिए गए हैं। सरकार से दो बार बातचीत हो चुकी है। सरकार हमारी मांगों के प्रति गंभीर दिखाई नहीं दे रही है। समिति सभी जगहों पर शांतिपूर्वक धरने दे रही है। भीड़ बढ़ाने के साथ धरनों की संख्या बढ़ाने के बारे में भी निर्णय लिया गया है। 26 फरवरी को धरना स्थलों पर काला दिवस मनाया जाएगा। एक मार्च को असहयोग आंदोलन शुरू किया जाएगा। जिस दिन कोई भी जाट दूध व सब्जी नहीं बेचेगा। दिल्ली में दूध की सप्लाई नहीं करेंगे। 2 मार्च को दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर संसद घेराव करने जाएंगे, जिससे सोनीपत, पानीपत, रोहतक, झज्जर सहित आसपास के जिले से ट्रैक्टर ट्रॉली से जाएंगे। दूर दराज के जिले अन्य वाहनों में जाएंगे।
सरकार हर बार करती वादाखिलाफी : पूनिया
शुक्रवार को रामायण ट्रैक के पास महासचिव महेंद्र पूनिया ने 27वें दिन धरने पर मौजूद लोगों से कहा कि हम अभी तक शांतिपूर्वक धरने दे रहे हैं। आगे भी शांति का परिचय देना है। सरकार अभी गंभीर दिखाई नहीं दे रही है। राजमल धनाना ने कहा कि जब तक सरकार मांगें पूरी नहीं करती धरने जारी रहेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार हर बार वादाखिलाफी करने का काम करती है। धरनों पर हाजिरी बढ़ाकर सरकार पर दबाव बनाया जाएगा।
मोबाइल नंबर की बना रहे लिस्ट
जाट नेताओं ने एक बार फिर अपील कि धरनों पर संख्या हर रोज बढ़ानी होगी। जो लोग अभी धरनों से दूरी बनाए हुए हैं उन्हें लाना होगा। साथ ही समिति ने धरनों पर आने वाले लोगों की लिस्ट बनानी शुरू कर दी है ताकि जरूरत पड़ने पर उनसे संपर्क करके हाजिरी बढ़ाई जा सके। गांव वाइज गणमान्य व्यक्तियों के मोबाइल नंबर लिखे जा रहे हैं।