प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने सोमवार को फतेहाबाद के गोरखपुर में 2800 मेगावाट के हरियाणा के पहले परमाणु बिजली संयंत्र का शिलान्यास किया।
इस मौके पर उन्होंने कहा कि हरियाणा में 23502 करोड़ रुपये की लागत का यह परमाणु संयंत्र पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित है।
इसमें सुरक्षा मानकों का पूरी तरह ध्यान रखा गया है। भविष्य में भी देश में स्वदेशी तकनीक पर आधारित परमाणु संयंत्र ही लगाए जाएंगे। गुजरात के काकरापार और राजस्थान के रावतभाटा में भी इसी तकनीक पर आधारित बिजली संयंत्र जल्द स्थापित किए जाएंगे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि गोरखपुर परमाणु बिजली संयंत्र के पहले चरण में 21 हजार करोड़ रुपये की लागत से 1400 मेगावाट बिजली की दो यूनिटें तैयार होंगी।
दूसरे चरण में 1400 मेगावाट की और दो यूनिट लगाई जाएंगी। पहले चरण की 1400 मेगावाट बिजली का उत्पादन 2020-21 तक शुरू होगा।
इस मौके पर राज्यपाल जगन्नाथ पहाड़िया, केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कुमारी शैलजा, केंद्रीय मंत्री वी. नारायण स्वामी, सिरसा के सांसद डॉ. अशोक तंवर और एनपीसीआईएल के शीर्ष अधिकारी मौजूद थे।
27 हजार मेगावाट का लक्ष्य
प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा कि वर्ष 2008 में अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ किए गए समझौते की बदौलत परमाणु बिजली संयंत्र स्थापित करने और इसके लिए परमाणु ईंधन की आपूर्ति मिलना संभव हुआ है।
अब अगले 10 वर्षों में देश 27 हजार मेगावाट से अधिक परमाणु बिजली के उत्पादन में सक्षम होगा। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से उत्पन्न होने वाली 50 प्रतिशत बिजली हरियाणा के लोगों के लिए इस्तेमाल होगी।
उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास के मामलों में हरियाणा ने अन्य राज्यों से जो बढ़त बना रखी है, उसे इस प्रोजेक्ट से और अधिक मजबूती मिलेगी।
उन्होंने कहा कि देश में उपलब्ध बिजली ऊर्जा उत्पादन के सभी संसाधनों जैसे ताप, पन, गैस, सौर और परमाणु संसाधनों का उपयोग करना होगा।
सुरक्षा का भरोसा दिया
परमाणु बिजली को ऊर्जा का एक साफ-सुथरा जरिया बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे पर्यावरण पर बहुत कम असर पड़ता है।
इस परियोजना के लिए सहयोग देकर हरियाणा के लोगों ने यह सिद्ध कर दिया है कि वे सूझबूझ से काम लेते हैं और नई टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से बेवजह नही डरते हैं।
उन्होंने कहा कि यह परियोजना देश में विकसित तकनीक पर आधारित है। इस टेक्नोलॉजी का अच्छी तरह से परीक्षण किया गया है। यहां लगाए जाने वाले रिएक्टर गुजरात और राजस्थान में भी स्थापित किए जाएंगे। परमाणु परियोजना में सुरक्षा मानदंड को बहुत ऊंचा रखा गया है और इस बात का पूरा ध्यान रखा जाएगा कि कभी भी सुरक्षा के विषय में कोई कमी न आने पाए।