हिसार। करीब 15 लाख रुपये के कथित फर्जी समझौते, धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले में शिकायतकर्ता सुभाष उर्फ भज्जी को अदालत से राहत नहीं मिली। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ खत्री की अदालत ने शुक्रवार को निचली अदालत के उस आदेश को बरकरार रखा जिसमें आरोपियों को समन जारी करने से इन्कार करते हुए शिकायत खारिज कर दी गई थी। साथ ही शिकायतकर्ता की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका भी खारिज कर दी गई।
याचिकाकर्ता सुभाष उर्फ भज्जी ने आरोप लगाया था कि जींद जिले के ऋषि कपूर समेत अन्य लोगों ने उनसे, उनके पिता और एक अन्य व्यक्ति से कोरे कागजों पर हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान करवा लिए। इसके बाद 21 अक्तूबर 2015 की तारीख का कथित फर्जी समझौता तैयार किया गया, जिसमें अमन नामक व्यक्ति को 15 लाख रुपये देने की बात दर्शाई गई।
शिकायतकर्ता के अनुसार बाद में इसी समझौते के आधार पर उनसे पांच लाख रुपये की मांग की गई और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी गई। उन्होंने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश सहित विभिन्न धाराओं में कार्रवाई की मांग की थी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि शिकायतकर्ता यह स्पष्ट नहीं कर सका कि कोरे कागजों पर हस्ताक्षर कब और किन परिस्थितियों में कराए गए। अदालत ने यह भी कहा कि यदि ऐसी घटना हुई होती तो तत्काल पुलिस शिकायत की अपेक्षा की जाती, जबकि रिकॉर्ड में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला। धारा 202 सीआरपीसी के तहत मंगाई गई पुलिस रिपोर्ट में भी आरोपों की पुष्टि नहीं हुई। इन तथ्यों के आधार पर अदालत ने पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी।