सरकार ने प्रदेश के सभी नगर निगम, परिषदों, पालिकाओं से मीट की दुकानों के बारे में रिपोर्ट मांगी है। सीएम ने पूछा है कि आपके शहर में मीट की कितनी दुकानें हैं। इनमें से कितने दुकानदारों के पास लाइसेंस हैं। कितने लोग बिना लाइसेंस अवैध तरीके से मीट की दुकान चला रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार नगर निगम एरिया में कोई भी ऐसी मीट की शॉप नहीं है, जिनके पास लाइसेंस हो। निगम एरिया में करीब 100 से ज्यादा मीट की दुकानें हैं, जो कानूनी रूप में अवैध हैं।
स्लाटर हाउस के बारे में भी मांगी रिपोर्ट
सरकार ने स्लाटर हाउस के बारे में भी रिपोर्ट मांगी है। स्लाटर हाउस को लेकर क्या स्थिति है। इसके बारे में भी जानकारी उपलब्ध करवानी है। स्लाटर हाउस को पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने कई साल से सील कर रखा है। निगम ने पिछले तीन चार साल से ऑनलाइन आवेदन ही नहीं किया। इसी के चक्कर में पूरा मामला अटका हुआ है। निगम को स्लाटर हाउस सील खुलवाने के लिए की पॉल्यूशन डिपार्टमेंट से सील खुलवाने के लिए ऑनलाइन आवेदन करना था। इसकी करीब पांच हजार रुपये फीस है। किसी अधिकारी ने इसको लेकर रुचि नहीं दिखाई। जिसके कारण आज तक स्लाटर हाउस की सील ही नहीं खुल पाई। निगम इसकी वर्तमान स्टेटस रिपोर्ट भी उच्च अधिकारियों को भेजेंगे।
डोर टू डोर बता रहे, खुले में मीट काटना बंद करें
स्वास्थ्य शाखा के अधिकारी कर्मचारी इस मामले के बाद पूरी तरह से अलर्ट हो गए हैं। अधिकारियों ने कुछ कर्मचारियों की ड्यूटियां लगा दी हैं कि वे खुले में मीट काटने व बेचने वालों को जागरूक करें। मीट को ढककर रखें। मीट दुकान के अंदर ही काटें। खुले में मीट काटने वालों पर कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। दूसरा निगम ने ऐसे दुकानदारों को भविष्य में लाइसेंस न देने की बात भी कही है।
कमिश्नर ने जानी 309 की पावर
नगर निगम कमिश्नर भी इस मामले को लेकर पूरी तरह से गंभीर है। उन्होंने हाल ही में निगम एक्ट मंगवाकर खुले में मीट काटने, गंदगी फलाने सहित कई गैर कानूनी कार्यों के बारे में कमिश्नर की पावर जानी। खुले में मीट काटने, बेचने के मामले में निगम एक्ट की धारा 309 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इसमें खुले में मीट बेचने वालों पर जुर्माना लगाने के अलावा उन्हें सील भी किया जा सकता है।
मीट मार्केट संबंधित स्वास्थ्य शाखा के अधिकारियों को कार्रवाई करने संबंधित निर्देश दिए जा चुके हैं। स्लाटर हाउस की सील खुलवाने बारे भी कार्रवाई प्रोसेस में है।
-इंद्रजीत कुल्हड़िया, ईओ नगर निगम