हिसार। नगर निगम को इस साल मार्च तक ढंढूर के पास बने पुराने कचरे के पहाड़ को खत्म करना होगा। बुधवार को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की दो सदस्यीय टीम ने डंपिंग स्टेशन का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने डंपिंग स्टेशन पर किए जा रहे कचरे के निस्तारण कार्य को देखा। साथ ही निगम ने कचरे की रिपोर्ट भी तलब की। बता दें कि नगर निगम के ढंढूर के पास बने डंपिंग स्टेशन पर 4 से 5 साल पुराना कचरा अभी तक पड़ा है। कुछ समय पहले ही इस कचरे के निस्तारण का काम शुरू किया गया है।
एनजीटी टीम ने अधिकारियों से पूछे सवाल
एनजीटी टीम ने निगम अधिकारियों से कई सवाल-जवाब किए। टीम ने पूछा कि यहां डंपिंग स्टेशन पर कितना पुराना कचरा पड़ा है और उसमें से कितने कचरे का निस्तारण किया जा चुका है। कब तक इस कचरे का निस्तारण कर दिया जाएगा। प्रतिदिन एजेंसी कितने कचरे का निस्तारण कर रही है।
1.22 लाख टन कचरे का किया जाना है निस्तारण
निगम प्रशासन की मानें तो ढंढूर के पुराने डंपिंग स्टेशन से करीब 2 किलोमीटर अंदर नए डंपिंग स्टेशन पर करीब 1.22 लाख टन कचरे का ढेर पड़ा है, जो करीब 12 एकड़ एरिया में पड़ा है। निगम की तरफ से इसका निस्तारण का टेंडर किया जा चुका है। एजेंसी अब तक 10 से 15 प्रतिशत कचरे का निस्तारण कर चुकी है। टेंडर की शर्त के अनुसार एजेंसी को मार्च तक इस पूरे कचरे का निस्तारण करना है। एनजीटी की डेडलाइन भी मार्च ही है। निगम अधिकारियों के अनुसार अभी तक केवल 15 फीसदी कचरे का ही निस्तारण हो सका है।
पुराने डंपिंग स्टेशन पर 130 लाख टन कचरे का किया जा चुका निस्तारण
निगम ने ढंढूर के सामने डंपिंग स्टेशन बनाने के लिए राजकीय पशुधन फार्म से जमीन ली थी। कई वर्षों तक निगम यहां कचरा डालता रहा। निस्तारण व्यवस्था न होने से यहां कचरे के ढेर लगते गए। ढंढूर के ग्रामीण इस डंपिंग स्टेशन का विरोध करते थे, क्याेंकि अक्सर कूड़े के ढेर में आग लगती रहती थी, जिसके धुएं से ग्रामीणों को काफी परेशानी होती थी। इसी बीच एयरपोर्ट पर हवाई पट्टी के विस्तार का कार्य शुरू हो गया था और यह डंपिंग स्टेशन एयरपोर्ट के 10 किलोमीटर के दायरे में आ गया था। इसे देखते हुए निगम यहां इकट्ठा हुए 130 लाख टन लीगेसी वेस्ट के निस्तारण का टेंडर लगा दिया और इस साइट पर कचरा भी डालना बंद कर दिया। करीब डेढ़ साल पहले ही इस कचरे का निस्तारण का कार्य पूरा हुआ है। इसके बाद नई जगह पर कचरे का पहाड़ बन गया।
यूं किया जाता है कचरे का निस्तारण
ट्रोमल मशीन की सहायता से कचरे को तीन वर्गों में सेग्रीगेट किया जाता है, जिसमें 50 एमएम से ऊपर, 50 से 10 एमएम के बीच व 10 एमएम से कम का आकार शामिल है। 50 एमएम से ज्यादा आकार वाले को आरडीएफ कहा जाता है, जिसमें कपड़ा, प्लास्टिक आदि शामिल है। इसे मुरथल स्थित जीबीएम वेस्ट एनर्जी को भेजा जाता है, जहां इससे बिजली बनती है। वहीं 50 से 10 एमएम के बीच के आकार वाले को इनर्ट कहा जाता है। इसका इस्तेमाल सड़क निर्माण में किया जाता है। 10 एमएम से कम आकार वाले को कंपोस्ट के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।