हिसार। मशरूम उत्पादक किसान डॉ. विकास वर्मा को एचएयू में किया जाएगा सम्मानित।
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हिसार। चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) की तरफ से मंगलवार को आयोजित दो दिवसीय कृषि मेले में हिसार खंड के सलेमगढ़ गांव निवासी डॉ. विकास वर्मा को मशरूम की खेती के लिए सम्मानित किया जाएगा। पहले खुद के रोजगार के लिए मशरूम उत्पादन शुरू करने वाले डॉ. विकास आज कांट्रैक्ट फार्मिंग के विशेषज्ञ हो गए हैं। इनकी खुद की कंपनी है जो किसानों को खेती में नई तकनीक सिखाने में सहयोग देने के साथ-साथ उनसे उत्पादित मशरूम की खरीद करती है।
डॉ. विकास ने बताया कि मशरूम की खेती की दो विधियां हैं ड्राई ऑस्टर मशरूम और ह्वाइट बटन मशरूम। अपने यहां अधिकांश किसान ह्वाइट बटन मशरूम की खेती करते हैं। 30 गुना 60 फुट की जगह में ह्वाइट बटन मशरूम की खेती करने में करीब पांच लाख रुपये का खर्च आता है और अधिकतम सात लाख रुपये तक किसान को मिल पाता है। पूरे साल में केवल एक फसल ही कटती है, लिहाजा किसान का काफी वक्त बेकार चला जाता है। शुरुआत में डॉ. विकास ने भी इसी खेती को अपनाया, लेकिन 14 लाख रुपये का नुकसान होने के बाद खेती में हो रहे बदलाव को समझना शुरू किया। नई तकनीक की बारीकी समझने के बाद ड्राई ऑस्टर मशरूम की खेती शुरू की। डॉ. विकास बताते हैं कि 30 गुना 60 फुट की जगह में खेती की लागत करीब दो लाख रुपये आती है, जबकि उत्पाद की बिक्री से लगभग आठ लाख रुपये मिलते हैं। इस प्रकार खेती में लागत घटी और मुनाफा भी चार गुना बढ़ा। इससे उत्साहित होकर डॉ. विकास ने कई अन्य प्रकार की खेती भी शुरू की है। खेती में नए-नए प्रयोग को देखते हुए इन्हें केरल की ग्लोबल यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट की मानद उपाधि मिली। अब इनकी कंपनी किसानों को मशरूम की खेती के लिए प्रेरित करती है। किसान के खेत में उत्पादित मशरूम को खरीद भी लेते हैं, जिससे कि उन्हें दोहरा लाभ मिलता है।