हिसार। बीड़ बबरान धाम में 53वें बबरान नरेश प्रकटोत्सव के तहत श्रीमद्भागवत कथा आयोजित की जा रही है। शुक्रवार को कथा व्यास शैलेंद्र पाराशर महाराज ने नरसिंह अवतार और वामन अवतार के प्रसंग सुनाए।
महाराज ने बताया कि भगवान केवल राक्षसों का नाश करने के लिए नहीं, बल्कि भक्तों के प्रेम से प्रभावित होकर अवतार लेते हैं। इंसान धन और संपत्ति की लालसा में भगवान के दरबार आता है इसलिए सही यह है कि आराधना करते हुए अपने इष्ट से ही धन और सुख की कामना करें।
भगवान विष्णु ने भक्त प्रह्लाद की रक्षा और अहंकारी राक्षस हिरण्यकश्यप का वध करने के लिए नरसिंह अवतार धारण किया। हिरण्यकश्यप को वरदान प्राप्त था कि वह न दिन में मरेगा, न रात में, न घर के अंदर न बाहर, न अस्त्र-शस्त्र से, न नर-पशु से। लेकिन भगवान की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित रहे। नरसिंह अवतार अहंकार के अंत और भक्तों के प्रति ईश्वर के प्रेम का प्रतीक है।
वामन अवतार में भगवान ने असुरराज बलि के अहंकार को समाप्त किया और देवताओं को स्वर्ग दिलाया। वामन ने बलि से तीन पग भूमि मांगी। पहले पग में पूरी पृथ्वी और दूसरे पग में स्वर्ग नाप लिया। तीसरे पग के लिए जगह न होने पर बलि ने अपना सिर आगे किया, जिससे उन्हें पाताल लोक भेजा गया। बलि की निस्वार्थ भक्ति और दानवीरता से भगवान प्रसन्न हुए।
इस दौरान श्याम भक्त धर्मवीर बंसल यजमान रहे। आयोजन समिति के प्रधान शिव कुमार सिंगल, पंकज शर्मा, रामशरण सिंगल, विनोद गोयल, अनुज शर्मा, जयदीप सिंधु, महंत महाराज विनोद शर्मा और पुजारी विनय शर्मा आदि मौजूद रहे।