हिसार। बकाया प्रॉपर्टी टैक्स के ब्याज में 50 प्रतिशत छूट के आखिरी दिन मंगलवार को निगम कार्यालय में टैक्स के रूप में 17.09 लाख रुपये जमा हुए। इसके साथ ही बुधवार को 100 प्रतिशत ब्याज के साथ बकाया प्रॉपर्टी टैक्स जमा करवाना होगा। इससे पहले सोमवार को 8.35 लाख रुपये प्रॉपर्टी टैक्स जमा हुआ था। जनवरी माह में निगम को प्रॉपर्टी टैक्स से 79.57 लाख रुपये की आय हुई है। हालांकि दिसंबर में आखिरी तीन दिनों में ही करीब सवा करोड़ रुपये टैक्स जमा हो गया था।
बता दें कि इससे पहले शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने बकाया प्रॉपर्टी टैक्स जमा करवाने पर ब्याज में 100 प्रतिशत छूट देने की घोषणा की थी। यह छूट 31 दिसंबर तक लागू थी। हालांकि इसके बाद इस ब्याज में छूट की योजना को एक माह के लिए और बढ़ा दिया गया था। मगर ब्याज में छूट की सीमा को घटाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया था।
दो माह बचे, 22 करोड़ में से 9.76 करोड़ ही हुए जमा
निगम प्रशासन ने मौजूद वित्त वर्ष के बजट में प्रॉपर्टी टैक्स से 22 करोड़ रुपये की आय का लक्ष्य निर्धारित किया हुआ है। अब वित्त वर्ष पूरा होने में सिर्फ दो माह ही बचे हैं और अभी तक प्रॉपर्टी टैक्स से 9.76 करोड़ रुपये ही जमा हुए हैं। इस हिसाब से निगम प्रशासन निर्धारित लक्ष्य का 44 प्रतिशत ही हासिल कर पाया है।
पिछले वित्त वर्ष में लक्ष्य का 36 प्रतिशत हुआ था हासिल
पिछले वित्त वर्ष में भी निगम निर्धारित लक्ष्य को हासिल नहीं कर सका था। पिछले वित्त वर्ष में प्रॉपर्टी टैक्स से आय का लक्ष्य 24 करोड़ रुपये रखा गया था, जबकि 8.87 करोड़ रुपये ही टैक्स के रूप में जमा हुए थे।
टैक्स के बड़े डिफाल्टरों पर कार्रवाई नहीं
निगम का लक्ष्य हासिल न करने के पीछे एक बड़ी वजह टैक्स के बड़े डिफाल्टर हैं। निगम प्रशासन पर इन डिफाल्टरों पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। पिछले वित्त वर्ष में फरवरी में निगम ने 120 डिफाल्टरों को नोटिस थमाए थे। नोटिस देने के बाद ही इन डिफाल्टरों ने टैक्स भरने में रूचि नहीं दिखाई। वहीं निगम ने भी इन पर कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद निगम अधिकारियों ने मौजूद वित्त वर्ष के अगस्त में 100 डिफाल्टरों को नोटिस जारी किए थे, जिन पर करीब 40 करोड़ रुपये बकाया थे। इनमें भी गिने-चुने डिफॉल्टरों ने बकाया टैक्स जमा करवाया था। इस बार भी निगम ने टैक्स न जमा करवाने वालों पर कार्रवाई नहीं की।
दो साल से नहीं बंट रहे प्रॉपर्टी टैक्स के बिल
टैक्स कम जमा होने के एक कारण प्रॉपर्टी टैक्स बिल का वितरण न होना भी है। लोगों की यह धारणा बन चुकी है कि जब तक उन्हें बिल नहीं मिलता, तब तक वह टैक्स नहीं भरते। वहीं दो वर्षों से टैक्स के बिलों का वितरण ही नहीं किया जा रहा है। हालांकि बिल वितरण का काम प्रॉपर्टी टैक्स का सर्वे करने वाली कंपनी को करना था, लेकिन कंपनी ने नहीं किया। हालांकि कंपनी का कहना है कि उनकी तरफ से बांटे गए असेसमेंट नोटिस ही प्रॉपर्टी टैक्स के बिल थे।