हिसार। साइबर ठगी के पीड़ितों को अब होल्ड कराई गई रकम वापस पाने के लिए अदालतों और बैंकों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। इसके लिए एमआरएम (मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल) और जीआरएम (ग्रीवांस रिड्रेसल मैकेनिज्म) पोर्टल शुरू किए गए हैं। एमआरएम के माध्यम से 50 हजार रुपये से कम की होल्ड कराई गई ठगी की रकम एक माह में वापस मिल सकेगी।
वहीं साइबर ठगी से जुड़े मामलों में फ्रीज किए गए निर्दोष लोगों के बैंक खातों को जीआरएम के जरिये सत्यापन के बाद डी-फ्रीज कराया जा सकेगा। पुलिस प्रशासन के अनुसार, साइबर ठगी के बाद पीड़ित या साइबर पुलिस की तत्परता से यदि ठगी की रकम अपराधी के खाते में पहुंचने के बाद होल्ड करा दी जाती है तो पहले उसे वापस लेने के लिए अदालत में आवेदन करना पड़ता था।
इस प्रक्रिया में चार से पांच माह लग जाते थे। अब 50 हजार रुपये से कम की होल्ड राशि के लिए पीड़ित को एमआरएम पोर्टल पर आवेदन करना होगा और करीब एक माह में रकम वापस मिल सकेगी।
खाता फ्रीज होने पर जीआरएम से मिलेगी राहत
कई बार साइबर ठगी की रकम किसी ऐसे व्यक्ति के बैंक खाते में पहुंच जाती है, जिसका ठगी से कोई संबंध नहीं होता। ऐसी स्थिति में खाते को फ्रीज कर दिया जाता है और खाताधारक लेन-देन नहीं कर पाता। ऐसे लोग जीआरएम पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं। पुलिस सत्यापन के बाद यदि खाताधारक की ठगी में संलिप्तता नहीं मिलती है तो खाता डी-फ्रीज कर दिया जाएगा। खाते में आई ठगी की रकम ही वापस ली जाएगी।
यूं करें आवेदन
साइबर ठगी होने पर शुरुआती एक-दो घंटे में 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें या आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। रकम अपराधी के खाते में ट्रेस होकर फ्रीज होना जरूरी है। रकम निकल जाने के बाद रिफंड संभव नहीं होगा। एमआरएम पर उसी मोबाइल नंबर से लॉगिन करना होगा जिससे एनसीआरपी पर शिकायत की गई थी। यह प्रक्रिया पूरी तरह निशुल्क है।
साइबर ठगी के शिकार हुए लोगों की मदद के लिए एमआरएम व जीआरएम पोर्टल शुरू किए गए हैं। इन दोनों पोर्टल से साइबर ठगी के पीड़ितों को काफी फायदा होगा।
- मयंक मुदगिल, एएसपी।