विधायक रणबीर गंगवा ने कहा है कि पिछले डी प्लान के 8 करोड़ रुपये लैप्स हो गए थे। इस बार भी 13 करोड़ में से महज 39 प्रतिशत पर महज 5 करोड़ ही खर्च हो सके हैं। इसमें भी करोड़ों रुपये लैप्स होना तय है। विधायकों को डी प्लान में बजट नहीं दे रहे।
डिस्ट्रिक डेवलेपमेंट एंड मानीटरिंग कमेटी की मीटिंग बुधवार को लघु सचिवालय में जनस्वास्थ्य अभियंत्रिकी मंत्री डॉ. बनवारीलाल की अध्यक्षता में हुई। इसमें सीपीएस डॉ. कमल गुप्ता, नलवा विधायक रणबीर गंगवा, बरवाला विधायक वेद नारंग, उकलाना विधायक अनूप धानक, मेयर शकुंतला राजलीवाला, डिप्टी मेयर भीम महाजन, जिला परिषद वाइस चेयरमैन मीना शर्मा, ब्लॉक समिति वाइस चेयरमैन रविंद्र रॉकी, जिला पार्षद अरुणदत्त शर्मा सहित अन्य सदस्य शामिल हुए।
एजेंडे के पहले बिंदु पर ही विधायक रणबीर गंगवा ने सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले बजट में 11 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे, जिसमें सीएम मनोरहलाल खट्टर ने विधायकों की ओर से दिए गए एक एक करोड़ रुपये के काम कराने का एलान किया था। आज तक वह काम पूरा नहीं हो सका। अधिकारियों ने करीब 8 करोड़ रुपये का बजट लैप्स करा दिया। इस साल 13 करोड़ रुपये के बजट में विधायकों की मंजूरी नहीं ली गई। जनप्रतिनिधियों की माननी ही नहीं तो उन्हें बुलाते क्यों हो। डी प्लान में अब तक 39 प्रतिशत काम ही हो सका है। डेढ़ महीने में 61 प्रतिशत काम कैसे कराएंगे। इस बार भी करोड़ों का बजट लैप्स होना तय है। विपक्ष के विधायकों के महज 8 लाख रुपये के काम कराए गए हैं। विधायक अपने एरिया का चुना हुआ जनप्रतिनिधि है। हर विधायक को कम से कम 50-50 लाख का बजट दिया जाए। सीपीएस डॉ. कमल गुप्ता ने कहा कि बजट का कोई इश्यू नहीं है। आप काम बताओ मैं कराऊंगा। सीएम घोषणा के करोड़ों रुपये हैं। विधायक जी अभी कामों की सूची दो।
2017-18 के बजट को आबादी के हिसाब से खर्च करेंगे
मीटिंग में प्रस्ताव रखा कि 2017-18 के लिए डी प्लान से जो बजट मिलेगा उसे पूरे जिले में खर्च किया जाएगा। बजट को आबादी के अनुसार खर्च किया जाएगा। जिसमें शहर व गांव के लिए अलग अलग खर्च के मानक तय हैं। इस बजट में अनुसूचित वर्ग के लिए भी हिस्सा तय किया जाएगा।
पार्षदों से विमर्श कर खर्च हो बजट
मेयर शकुंतला राजलीवाला ने कहा कि नगर निगम एरिया में पार्षद अपने एरिया का जनप्रतिनिधि है। डी प्लान के काम का बजट खर्च करने से पहले पार्षदों से विमर्श किया जाना चाहिए। पार्षद अपने एरिया की समस्याओं, दिक्कतों को अधिक बेहतर बता सकते हैं। काम की प्राथमिकता भी पार्षदों से जाननी चाहिए।