प्रदेश के पशुपालकों को अब दुग्ध उत्पादों का प्रशिक्षण लेने के लिए लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास) आने की जरूरत नहीं पड़ेगी। विश्वविद्यालय की तरफ से तैयार की जा रही मिल्क प्रोसेसिंग डेमोस्ट्रेशन कम एग्जिबिशन वैन (दूध की चक्की) अब पशुपालकों को उनके गांव में ही यह प्रशिक्षण सुविधा उपलब्ध कराएगी। दूध की चक्की इसके लिए हर गांव में जाएगी। इस दौरान पशुपालकों को दूध से उत्पाद बनाकर बेचने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
विश्वविद्यालय के अनुसार आज के समय में ज्यादातर पशुपालक अपने पशुओं का दूध बेच रहे हैं, जिससे उन्हें कोई खास आमदनी नहीं हो रही है। अगर पशुपालकों को अपनी आमदनी बढ़ानी है तो उन्हें दूध के बजाय उससे बने उत्पाद जैसे खोवा, पनीर, बर्फी आदि बनाकर बेचने होंगे।
पशुपालन विभाग के पास भेजा था प्रोजेक्ट: विश्वविद्यालय ने दूध की चक्की का प्रोजेक्ट बनाकर पशुपालन विभाग के पास भेजा था। इसके तहत विश्वविद्यालय ने एक मिल्क प्रोसेसिंग डेमोस्ट्रेशन कम एग्जिबिशन वैन तैयार कराने की बात कही थी। मगर पशुपालन विभाग को यह प्रोजेक्ट इतना पसंद आया कि उसने विश्वविद्यालय को छह ऐसी वैन तैयार कराने की अनुमति दे दी। पशुपालन विभाग की तरफ इस प्रोजेक्ट के लिए विश्वविद्यालय को करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये का बजट अलॉट किया है।
वैन में यह होगी सुविधा: इस प्रोजेक्ट के को-पीआई डॉ. योगेंद्र यादव के मुताबिक मिल्क प्रोसेसिंग डेमोस्ट्रेशन कम एग्जिबिशन वैन में आइसक्रीम मेकिंग यूनिट, खोवा मेकिंग मशीन, मिल्क चिलिंग मशीन, मिल्क टेस्टिंग मशीन, क्रीम निकालने की मशीन स्थापित की जाएंगी। इसमें बिजली के लिए सोलर पैनल और जेनरेटर की भी व्यवस्था होगी। इसके अलावा इसमें तीन लोगों के सोने, बाथरूम आदि की भी प्रबंध भी होगा।
पशुपालकों के दूध एकत्रित कर उससे उत्पाद बनाएंगे: यह दूध की चक्की जिस भी गांव में जाएगी, पहले वहां के पशुपालकों को दूध एकत्रित करने के लिए कह दिया जाएगा। यह वैन उस एकत्रित किए गए दूध से उत्पाद बनाकर दिखाएगी। यह उत्पाद बनाने के बाद पशुपालकों को वापस कर दिए जाएंगे। उत्पाद बनाने की एवज में पशुपालकों से मामूली फीस ली जाएगी।
वैन पर तैनात किए जाएंगे तीन कर्मचारी: विश्वविद्यालय के अनुसार वैन पर तीन कर्मचारी तैनात किए जाएंगे, जिनमें एक ड्राइवर, एक हेल्पर व एक डेमोस्ट्रेटर शामिल हैं। इस वैन को शुरू करने से पहले हेल्पर व डेमोस्ट्रेटर को विश्वविद्यालय की तरफ से प्रशिक्षित किया जाएगा।
पशुपालकों की बढ़ेगी आमदनी तो लोगों को मिलेंगे शुद्ध उत्पाद: विश्वविद्यालय के अनुसार आजकल दूध और दूध से बने उत्पादों में काफी मिलावट की जा रही है। मगर जब पशुपालक अपने स्तर पर दुग्ध उत्पाद बनाकर बेचेंगे तो न सिर्फ इससे उनकी आमदनी बढ़ेगी, बल्कि लोगों को शुद्ध उत्पाद उपलब्ध होंगे।
अभी फिलहाल एक ही वैन तैयार की जा रही है। इसके बाद अन्य वैन बनाने के ऑर्डर भी दिए जाएंगे। उम्मीद है कि पहली वैन अगले महीने में बनकर तैयार हो जाएगी। पहली वैन महेंद्रगढ़ जिले के रिवासा स्थित विश्वविद्यालय के पशु विज्ञान केंद्र पर रखी जाएगी।
- डॉ. दिवाकर शर्मा, डीन, डेयरी साइंस कॉलेज, लुवास