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महाशिवरात्रि विशेष : अज्ञातवास में दृश्यवती नदी के किनारे रुके पांडवों ने की थी शिवलिंग की स्थापना, अब बन रहा दक्षिण भारतीय शैली में भव्य मंदिर

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सीसवाल में बनाया जा रहा ​शिवमंदिर।
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रवि घोड़ेला
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बालसमंद। आदमपुर मंडी से करीब 10 किलाेमीटर दूर गांव सीसवाल व मोहब्बतपुर के बीच स्थित शिव मंदिर में महाशिवरात्रि के दिन करीब एक लाख श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरण की तैयारी चल रही है। 750 वर्ष प्राचीन इस मंदिर में महाभारत कालीन शिवलिंग स्थापित है। तीन साल से मंदिर का जीर्णोद्धार का कार्य चल रहा है।

मंदिर के पुजारी रविकांत शर्मा ने बताया कि ऐसी मान्यता है कि सीसवालिय सभ्यता के कारण इस गांव का नाम सीसवाल पड़ा, जो कभी सरस्वती नदी की सहायक नदी दृश्यवती के किनारे बसा था। महाभारत काल में अज्ञातवास के दौरान पांडव सीसवाल गांव के वनों में रहे। यहां पांडवों ने शिवलिंग की स्थापना की जो वर्तमान में शिव मंदिर में मौजूद है। मंदिर परिसर में एक फ्रास का पेड़ है जहां एक संत तपस्या करते थे। इसी संत को स्वप्न में पेड़ के नीचे शिवलिंग दबा होने का पता चला। इसके बाद खोदाई करने पर यहां 9-10 फुट लंबा शिवलिंग मिला। संवाद
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शिवलिंग पर विशेष भाषा में लिखी है शब्दावली

मंदिर कमेटी के प्रधान घीसाराम जैन ने बताया कि इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग की बाहरी लंबाई चार फुट से अधिक है। शिवलिंग पर बहुत ही बारीक शब्दों में कुछ लिखा है, जिसे अभी तक पढ़ा नहीं जा सका है। प्राचीन मंदिर के निर्माण में जो ईंटें लगी हैं उनकी लंबाई 1.25 फुट व चौड़ाई 0.75 फुट है। करीब तीन साल से सीसवाल धाम स्थित शिवालय का जीर्णोद्धार किया जा रहा है। कमेटी प्रधान घीसाराम ने बताया कि अभी करीब दो साल का समय और लगेगा। शिव मंदिर को भव्य रूप देने के लिए राम मंदिर अयोध्या के आर्किटेक्चर और राजस्थान के भरतपुर जिले के बंसी पहाड़पुर का पत्थर लगाया गया है।
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एक लाख लड्डू बन रहे हैं, पूरे दिन चलेगा भंडारा

मंदिर पुजारी रविकांत शर्मा ने बताया कि श्रद्धालु अपनी इच्छा के अनुसार यहां प्रसाद चढ़ाते हैं और श्रद्धालुओ में बांटते हैं। 18 फरवरी को महाशिवरात्रि के लिए संपूर्ण भंडारा चलाने के लिए तैयारियां चल रही हैं। श्रद्धालुओं को हलवा-पूरी, रोटी सब्जी सहित अन्य खाद्य सामग्री दी जाएगी। इसके अलावा एक लाख लड्डू का प्रसाद भी बनवाया जा रहा है।

सीसवाल में बनाया जा रहा शिवमंदिर।

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