हिसार। लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास) में इलाज के लिए आए जींद जिले के दो घोड़ों में ग्लैंडर्स के लक्षण मिले हैं, जिनमें से एक घोड़े में बीमारी की पुष्टि हो गई है, जबकि दूसरे का सैंपल दोबारा जांच के लिए भेजा गया है। इसके अलावा इन घोड़ों के संपर्क में रहे 10 अन्य घोड़ों का भी सैंपल लिया गया है, जिनकी जांच दो दिन में पूरी होगी। वहीं, जिस घोड़े में बीमारी की पुष्टि हुई है, उसे सुरक्षित तरीके से मार देने के लिए जींद के पशुपालन विभाग को रिपोर्ट भेजी गई है।
जींद सब्जी मंडी इलाके से एक अश्व पालक बुधवार को दो बीमार घोड़ों को इलाज के लिए लुवास के पशु अस्पताल में लेकर आया था। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार में लक्षण ग्लैंडर्स जैसा होने पर इसकी जानकारी राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र (एनआरसीई) हिसार को दी। डॉ. हरिशंकर सिंघा की अगुवाई वाली टीम ने दोनों घोड़ों का सैंपल लिया। जांच में एक घोड़े में बीमारी की पुष्टि हुई है, जबकि दूसरे सैंपल की रिपोर्ट संदिग्ध मिली। इसकी दोबारा जांच करवाई गई है। डॉ. हरिशंकर ने बताया कि अश्व पालक को अपने स्वस्थ घोड़ों की नियमित देखभाल, परिसर में सफाई व चूने का छिड़काव करने, घोड़ों का एक-दूसरे से संपर्क नहीं होने देने का सुझाव दिया गया है।
सिरसा, झज्जर में भी मिल चुके केस
हिसार के आसपास के जिलों में लगातार ग्लैंडर्स के मामले सामने आ रहे हैं। वीरवार को मिले मामले से पहले सिरसा के डबवाली, रोहतक और झज्जर जिले के कुछ घोड़ों में ग्लैंडर्स की पुष्टि हुई थी। इसके अलावा पड़ोसी प्रांत राजस्थान के जयपुर समेत कई जिलों में ग्लैंडर्स के मामले सामने आए हैं। बीमारी के चलते इस बार उत्तराखंड में पशुओं का मेला भी नहीं लगाया गया।