हिसार। हिसार की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जास्मिन शर्मा की अदालत ने करीब छह साल पुराने आरपीएफ सब-इंस्पेक्टर मनीष कुमार शर्मा हत्याकांड में वीरवार को फैसला सुनाया। मुख्य आरोपी संदीप उर्फ बांगरू को हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और 15 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है। आरोपियों को शरण देने के दोषी बुडाखेड़ा गांव निवासी मुकेश उर्फ मुडा को नौ माह की सजा मिली है। अन्य सात दोषियों को काटी गई जेल अवधि के आधार पर रिहा कर दिया। अदालत ने माना कि यह घटना अचानक हुए विवाद का परिणाम थी, इसलिए आठ आरोपियों के खिलाफ हत्या के लिए सामूहिक उद्देश्य सिद्ध नहीं हो सका।
दोषियों में आदमपुर निवासी दीपक उर्फ ढेलिया, खेड़ा निवासी पवन उर्फ मोदी, मतलोडा निवासी अमित उर्फ मिता, नलवा निवासी जय भगवान उर्फ सोनू, भिवानी के साई रेवाड़ी निवासी दिनेश उर्फ फौजी, जींद के खरकरामजी निवासी सुनील उर्फ शीला और जींद के जुलाना निवासी प्रियवर्त उर्फ कुकी शामिल हैं। इन सभी को नौ माह से दो साल तक की सजा सुनाई गई। हालांकि ये सभी पौने दो साल से छह साल तक पहले ही जेल में रह चुके हैं। इस कारण इन्हें रिहा कर दिया गया। 18 मई 2020 को आरपीएफ चौकी उकलाना को सूचना मिली थी कि रेलवे स्टेशन और भूना रोड रेलवे फाटक के बीच रेलवे लाइन पर कुछ संदिग्ध युवक बैठे हैं। सूचना पर एसआई मनीष शर्मा, सिपाही सतीश कुमार और विनोद कुमार मौके पर पहुंचे। पुलिस द्वारा पूछताछ करने पर आरोपियों ने अभद्रता शुरू कर दी और हथियार निकाल लिए। आरोप है कि संदीप उर्फ बांगरू ने कट्टा निकालकर एसआई मनीष शर्मा के सीने में गोली मार दी जिससे उनकी मौत हो गई थी। जीआरपी थाना पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ हत्या समेत अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की थी।