नारनौंद। जिस धान की पराली को अक्सर किसान फसल कटाई के बाद एक समस्या मानते हैं और जिसके जलने से पर्यावरण प्रदूषण होता है, उसी को जींद जिले के रामराय गांव की महिलाओं ने कमाई का जरिया बना लिया है। हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से परशुराम स्वयं सहायता समूह की 14 महिलाएं पराली से लैंप, गुलदस्ते, कलमदान, सजावटी वस्तुएं और कागज के बैग जैसे आकर्षक उत्पाद तैयार कर रही हैं। समूह की प्रधान मोनिका इस काम से हर महीने 30 हजार रुपये तक कमा रही हैं।
अंतरराष्ट्रीय राखीगढ़ी महोत्सव में उनके उत्पाद लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। यह पहल महिला सशक्तीकरण के साथ पराली प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण की भी मिसाल पेश कर रही है। इस पहल में सरकारी सहायता की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। समूह को पराली से कागज तैयार करने के लिए लगभग पांच लाख रुपये कीमत की मशीन राज्य सरकार की ओर से निशुल्क उपलब्ध करवाई गई है। इस मशीन की मदद से महिलाएं पराली के अपशिष्ट हिस्से का उपयोग करके कागज तैयार करती हैं और फिर उससे बाजार की मांग के अनुरूप विभिन्न प्रकार के उत्पाद बनाती हैं।
समूह की प्रधान मोनिका ने बताया कि उनके समूह द्वारा हर वर्ष लगभग एक से दो एकड़ क्षेत्र से पराली खरीदी जाती है। उन्होंने बताया कि उत्पादों को ग्राहकों की मांग और पसंद के अनुसार तैयार किया जाता है। इनकी बिक्री केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि हरियाणा के अलावा देश के कई अन्य राज्यों में भी मांग के अनुरूप उत्पाद भेजे जाते हैं।
गुजरात, दिल्ली और नैनीताल जैसे क्षेत्रों में पराली से तैयार उत्पादों को अच्छी मांग मिल रही है। इससे समूह की महिलाओं को अपने उत्पादों के लिए व्यापक बाजार मिल रहा है।
पराली से कागज, कागज से बैग और पर्यावरण संरक्षण की
परशुराम स्वयं सहायता समूह की खास उपलब्धि पराली से कागज तैयार करना है। समूह की महिलाएं उत्पाद बनाने के बाद बचे हुए पराली के हिस्से को भी बेकार नहीं जाने देतीं, बल्कि उसका उपयोग कागज बनाने में करती हैं। इसके बाद इस कागज से ग्राहकों की पसंद और डिजाइन के अनुसार बैग तैयार किए जाते हैं। कागज से बने बैग पॉलिथीन के विकल्प के रूप में उपयोगी साबित हो रहे हैं। इनके इस्तेमाल को बढ़ावा मिलने से एकल उपयोग वाली प्लास्टिक की थैलियों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
पराली से बन रहे विशेष चित्र और आकर्षक उपहार
समूह की महिलाएं पारंपरिक उत्पादों के साथ-साथ नए प्रयोग भी कर रही हैं। मोनिका ने बताया कि समूह द्वारा पराली की मदद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चित्र भी तैयार किया जा चुका है। कि इच्छुक व्यक्ति अपनी पसंद के अनुसार अपना चित्र भी पराली से तैयार करवा सकता है। मोनिका के अनुसार, बाजार में सामान्य तौर पर फूलों, प्लास्टिक और अन्य सामग्रियों से बने उपहार उत्पाद देखने को मिलते हैं लेकिन पराली से तैयार वस्तुएं अपनी अलग पहचान रखती हैं। इनकी आकर्षक बनावट और दोबारा उपयोग किए जा सकने की विशेषता इन्हें उपयोगी बनाती है।
घरेलू कामकाज से स्वरोजगार तक का सफर
समूह की प्रधान मोनिका की कहानी भी महिला आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल है। उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले तक वह बेरोजगार थीं और घर के घरेलू कार्यों तक ही सीमित थीं। स्वयं सहायता समूह से जुड़ने और पराली से उत्पाद तैयार करने का काम शुरू करने के बाद उनकी जिंदगी में सकारात्मक बदलाव आया है। अब वह इन उत्पादों की बिक्री के माध्यम से हर महीने 30 हजार रुपये तक कमाने में सफल हो रही हैं।
राखीगढ़ी महोत्सव में मिल रही पहचान
अंतरराष्ट्रीय राखीगढ़ी महोत्सव परशुराम स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के लिए अपने उत्पादों को व्यापक स्तर पर प्रदर्शित करने का महत्वपूर्ण अवसर बनकर सामने आया है। महोत्सव में आने वाले पर्यटक और आगंतुक इन उत्पादों को देखकर उनकी उपयोगिता, बनावट और निर्माण प्रक्रिया के बारे में जानकारी ले रहे हैं। मोनिका ने बताया कि राखीगढ़ी महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी समूह के उत्पादों की सराहना की थी।