स्वामी सत्यानन्द महाराज श्रद्धालुओं को प्रवचन सुनाते हुए।
हिसार। अखिल भारतीय सोहम महामंडल शाखा के तत्वावधान में देवी भवन के गोयंका सेवा सदन के प्रांगण में आयोजित सात दिवसीय संत सम्मेलन के तीसरे दिन श्रद्धालुओं ने सत्संग की महिमा को सुना। स्वामी सत्यानन्द महाराज ने अपने प्रवचन में सत्संग की महिमा का विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि सत्संग की कोई भी पंक्ति मनुष्य का जीवन बदल सकती है क्योंकि सत्संग की महिमा अपरंपार है।
स्वामी सत्यानन्द महाराज ने आगे कहा कि हम बहुत ही सौभाग्यशाली हैं जिन पर प्रभु की विशेष कृपा हुई है जिससे हम प्रभु का सिमरन कर सकते हैं और प्रभु के बनाए जीवों से प्यार कर सकते हैं। उन्होंने नास्तिकों का उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ देशों में लोग परमात्मा को मानते ही नहीं और उनकी सोच यही रहती है कि जब तक जियो, खूब खाओ, खुद को चमकाओ और मस्त रहो, जो जी में आए वह करो। जबकि प्रभु का सिमरण और सत्संग आवश्यक है ताकि हम अपना जीवन पवित्र बना सकें। इसके अलावा अन्य संतों ने संस्कारों पर चर्चा की और सुंदर भजनों के माध्यम से उपस्थित श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध किया।
इस अवसर पर राकेश गर्ग, रामकुमार रावलवासिया, शिवकुमार गोयल, मनोज गर्ग सहित कई श्रद्धालुओं ने संत महापुरुषों को माला पहनाकर आशीर्वाद लिया। कार्यक्रम के अंत में भगवान की आरती की गई और उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण किया गया।