फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Hisar News: अवसाद के भंवर में जीवन...संवाद से तोड़ें मायूसी की बेड़ियां

विज्ञापन
विज्ञापन
हिसार। बढ़ता तनाव और अकेलेपन का सन्नाटा आज कई अनमोल जिंदगियों पर भारी पड़ रहा है। लेकिन, समय रहते अपनों की संवेदना और संवाद की डोर थाम ली जाए तो टूटते मन को फिर से उम्मीद की राह दिखाई जा सकती है। भावनात्मक सहारा, खुलकर बातचीत और चिकित्सकीय परामर्श के साथ सही उपचार मिले तो मायूसी में घिरे व्यक्ति के आत्मघाती विचारों और आत्महत्या की ओर बढ़ते कदमों को रोका जा सकता है।
विज्ञापन

जिले में इस साल अब तक 80 से अधिक मासूम जिंदगियों का असमय खामोश हो जाना एक गंभीर चेतावनी है। ऐसे में हम सजग बनें, अवसाद की इस खामोश महामारी को पहचानें और टूटते हौसलों को हमदर्दी का संबल दें।
मनोवैज्ञानिक डॉ. शालू के अनुसार, परिवार का कोई सदस्य लंबे समय तक गुमसुम, निराश या परेशान नजर आए तो उसकी बात सुनना और उसे भावनात्मक सहारा देना बेहद जरूरी है। जिले में हर माह आत्महत्या की करीब 10 से 15 घटनाएं सामने आती हैं। इनमें घरेलू कलह, प्रताड़ना, नशे की लत, बच्चों से माता-पिता की अत्यधिक अपेक्षाएं, बेरोजगारी और बीमारी प्रमुख कारण बताए गए हैं। आत्महत्या करने वालों में करीब 50 प्रतिशत की उम्र 40 वर्ष से कम है।
विज्ञापन

उन्होंने बताया कि लगातार मन अशांत रहना, निराशा, काम में मन न लगना, बार-बार रोना, आत्मग्लानि या मानसिक पीड़ा व्यक्त करना चेतावनी के संकेत हो सकते हैं। स्वयं को निकम्मा या अपराधी समझना, जिंदगी को व्यर्थ मानना, मृत्यु के विचार आना या आत्महत्या का प्रयास गंभीर संकेत हैं। ऐसे में व्यक्ति को अकेला न छोड़ें और तुरंत परिवार, चिकित्सक या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की मदद लें। संवाद और संवेदनशीलता का हाथ किसी की जिंदगी को नई दिशा दे सकता है।
एक मिनट, सही कदम व जागरूकता से कम होंगे मामले
डॉ. शालू ने बताया कि आत्महत्या के मामलों में करीब 78 प्रतिशत लोग निम्न या मध्यम आय वर्ग से होते हैं। 15 से 29 वर्ष की आयु के लोग विशेष रूप से संवेदनशील हो सकते हैं। चुप्पी तोड़ें, भाव साझा करें, एक मिनट, सही कदम और जागरूकता से ही आत्महत्या के मामलों को कम किया जा सकता है। आत्महत्या की प्रवृत्ति मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या हो सकती है और इसका उपचार संभव है। साइकोथेरेपी समेत अन्य मनोवैज्ञानिक उपचार प्रभावी हो सकते हैं।
यह संकेत दिखें तो हो सतर्क

आत्महत्या का पूर्व प्रयास।
शराब या नशे में बढ़ोतरी।
अपनों से कटे-कटे रहना या दूरी बनाना।
ये कदम उठाएं
ऐसे व्यक्ति को गंभीरता से लें और अकेला न छोड़ें।
ऐसे व्यक्ति की बात को ध्यान से सुनें।
भावनाओं की कद्र करें।
खतरनाक और घातक चीजों से दूरी
इस वर्ष का नारा- बातचीत शुरू करें
इस साल विश्व आत्महत्या दिवस की थीम आत्महत्या पर दृष्टिकोण बदलना है। यह थीम साल 2024 से 2026 तक के लिए तय की गई थी और 2026 इसका तीसरा और अंतिम वर्ष है। इस वर्ष का नारा है बातचीत शुरू करें। इसका मुख्य उद्देश्य आत्महत्या से जुड़े डर, चुप्पी और सामाजिक कलंक को खत्म करना तथा लोगों को खुलकर इस बारे में बात करने के लिए प्रेरित करना है ताकि समय पर मदद मिल सके।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें