हिसार। डिजिटल और ज्ञान आधारित युग में पुस्तकालयों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ये शिक्षा का आधार बने हुए हैं और व्यक्तित्व विकास में सहायक हैं। ज्ञान का प्रसार करने, समाज का बौद्धिक विकास करने और संस्कृति संरक्षण में भी योगदान देते हैं। यह बात चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) के कुलपति प्रो. बलदेव राज काम्बोज ने कही।
वह नेहरू पुस्तकालय की ओर से एसोसिएशन ऑफ सीनियर लाइब्रेरी एंड इनफार्मेशन प्रोफेशनल्स (एएसएलआईपी) के सहयोग से ''कोलब्रेटिव इंटेलिजेंस बिल्डिंग स्मार्टर लाइब्रेरीज टुगेदर'' विषय पर आयोजित राष्ट्रीय कॉन्क्लेव-2025 के समापन पर बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। कुलपति ने कहा कि पुस्तकालय अब सिर्फ पुस्तकों का संग्रह नहीं, बल्कि ज्ञान, नवाचार और सामाजिक विकास का प्रमुख केंद्र बन चुके हैं। ये शिक्षा, अनुसंधान, सांस्कृतिक विकास और मनोरंजन को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम में डॉ वेंकट राव पोकरी, राज टिहरी, डॉ.परमिंदर कौर सैनी, जहांगीर खान, डॉ दीप्ति मदान, डॉ. राजीव , डॉ. सीमा परमार, त्रिदीब चट्टोपाध्याय व सरदार जंग बहादुर सिंह पन्नू को सम्मानित किया गया। इस दौरान एएसएलआईपी के अध्यक्ष डॉ. आरपी कुमार व सचिव डॉ. राज कुमार उपस्थित रहे।
कृषि विज्ञान में पुस्तकालयों की अहम भूमिका
कुलपति ने बताया कि कृषि विज्ञान के क्षेत्र में पुस्तकालय महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये शोध, शिक्षा और विस्तार गतिविधियों को समृद्ध करने के लिए ज्ञान का प्रसार करते हैं। कृषि के विभिन्न विषयों जैसे बागवानी, पशु चिकित्सा, खाद्य प्रौद्योगिकी, और कृषि इंजीनियरिंग में पुस्तकालय एक केंद्रीय ज्ञान संसाधन के रूप में कार्य करते हैं।