हिसार। हिसार रोडवेज डिपो में पिछले माह 38 बसों को कंडम घोषित किया गया, लेकिन इनकी जगह अब तक नई बसें नहीं मिली हैं। डिपो को हाल ही में रोहतक, चरखीदादरी और नूंह से 2018 मॉडल बीएस-4 पुरानी बसें दी गई हैं। ऐसे में डिपो को मजबूरन इन्हीं बसों से संचालन करना पड़ रहा है।
फिलहाल डिपो के पास 254 बसें हैं, जबकि सवारियों की मांग के अनुसार कम से कम 100 नई बसों की जरूरत है। बसों की कमी के कारण ग्रामीण रूटों पर फेरियां घटा दी गई हैं।
डिपो प्रधान राजकुमार चौहान ने बताया कि घिराय, भूना, तोशाम, स्याहड़वा सहित कई रूटों पर सवारियों की संख्या अधिक है, लेकिन बसों की कमी से फेरियां कम करनी पड़ी हैं। रोडवेज में जल्द से जल्द बीएस-6 मॉडल की नई बसें आनी चाहिए ताकि यात्रियों को असुविधा न हो।
मिली बसों की लाइफ खत्म, हादसे का खतरा
डिपो प्रधान के अनुसार एक बस की लाइफ सात साल या सात लाख किलोमीटर तक होती है, लेकिन डिपो को मिली पुरानी बसें पहले ही अपनी मियाद पूरी कर चुकी हैं। उन्होंने कहा कि ये बसें कंडम की श्रेणी में आ चुकी हैं, जिससे हादसे का खतरा बना रहता है। वर्कशॉप की स्थिति पर चौहान ने बताया कि डिपो में सिर्फ दो नियमित मैकेनिक हैं, जबकि अधिकांश कार्य अप्रेंटिस के भरोसे चल रहा है। उन्होंने मांग की कि मैकेनिक की नियमित भर्ती की जाए क्योंकि पिछले कई वर्षों से नई भर्ती नहीं हुई है।
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हमें रोहतक, चरखीदादरी और नूंह से पुरानी बसें मिली थीं। इन बसों को चेक किया गया। उसके बाद ही रूट पर भेजी गई है। जल्द ही हमें नई बसें भी मिलेगी।
- राहुल मित्तल, महाप्रबंधक, रोडवेज।