हरियाणा प्रदेश का पहला डेयरी कॉलेज लुवास खोलने जा रहा है। देश में
यह 20वां डेयरी कॉलेज होगा। इसका नाम कॉलेज ऑफ डेयरी साइंस एंड टेक्नोलॉजी
रखा गया है।
वेटरनरी कॉलेज के बाद लुवास का यह दूसरा आधिकारिक कॉलेज होगा।
इस कॉलेज का शैक्षणिक सत्र इसी वर्ष जून से शुरू हो जाएगा। कॉलेज के डीन
की जिम्मेदारी एलपीटी विभाग के प्रोफेसर डॉ. रणधीर सिंह डाबर को सौंपी गई
है।
यह कोर्स करवाएगा कॉलेज
कॉलेज के पहले शैक्षणिक सत्र में बैचलर ऑफ डेयरी टेक्नोलॉजी कोर्स करवाया
जाएगा। यह कोर्स चार वर्ष का होगा। इसमें शुरुआत में 30 सीटें रखी गई हैं।
इनमें पहले तीन साल थ्योरी और चौथे वर्ष में छात्रों को प्रैक्टीकल वर्क के
बारे में सिखाया जाएगा। इस कोर्स के तहत जॉब प्लेसमेंट की सुविधा भी
छात्रों को दी जाएगी। इस कोर्स में लड़कियों के लिए भी सीटें आरक्षित रखी
गई हैं।
कॉलेज ऑफ डेयरी साइंस एंड टेक्नोलॉजी के डीन डॉ. रणधीर सिंह डाबर
ने बताया कि कॉलेज की इमारत बनने तक कक्षाएं एलपीटी विभाग में लगवाई
जाएंगी। अध्यापकों के लिए सरकार द्वारा 75 पोस्ट भी निर्धारित की गई हैं।
हर वर्ष 1000 छात्रों की आवश्यकता
दूध डेयरी कार्य के लिए भारत में हर वर्ष 1000 छात्रों की आवश्यकता पड़ती
है। देश में कुल 19 डेयरी कॉलेजों से सिर्फ 600 छात्र इस काम के लिए मिल पा
रहे हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए लुवास देश का 20वां कॉलेज शुरू
करने जा रहा है।
प्रवेश परीक्षा के माध्यम से होगा दाखिला
बैचलर ऑफ डेयरी टेक्नोलॉजी कोर्स में प्रवेश परीक्षा का प्रावधान रखा गया
है। प्रवेश परीक्षा में मेरिट के आधार पर ही छात्रों को कोर्स में प्रवेश
दिया जाएगा।
फिजिक्स, केमिस्ट्री मैथ में बारहवीं पास करने वाले विद्यार्थी
इस कोर्स के लिए आवेदन कर सकते हैं। जून माह में कोर्स में दाखिले के लिए
प्रॉस्पेक्टस मिलने शुरू हो जाएंगे, जुलाई में प्रवेश परीक्षा और अगस्त माह
से रेगुलर क्लासेज शुरू कर दी जाएंगी।
कोर्स के तहत मिलेगी जॉब प्लेसमेंट की सुविधा
चार वर्षीय बैचलर ऑफ डेयरी टेक्नोलॉजी कोर्स करने वाले विद्यार्थियों को
विश्वविद्यालय द्वारा जॉब प्लेसमेंट की सुविधा भी मिलेगी। दूध डेयरी
प्लांट्स के सरकारी व गैर सरकारी संस्थानों में इन छात्रों को नौकरी की
सुविधा प्रदान की जाएगी।
डेयरी प्लांट लगाया जाएगा छात्रों के लिए
कॉलेज में कोर्स करने वाले विद्यार्थियों को प्रैक्टीकल करवाने के लिए
कॉलेज में डेयरी प्लांट भी लगाया जाएगा, जिसमें कोर्स के चौथे वर्ष के
छात्रों को दूध और दूध से बने पदार्थों के बारे में विस्तार से सिखाया
जाएगा।
जमीन की स्वीकृति मिलने का इंतजार
कॉलेज के डीन रणधीर सिंह डाबर ने बताया पिछले डेढ़ साल से कॉलेज बनाने लिए
प्रयासरत है। 2014-15 में कॉलेज के लिए अप्रूवल मिलने पर इस सत्र से कॉलेज
शुरू किया जा रहा है।
जमीन मिलने तक कॉलेज की कक्षाएं एलपीटी विभाग में ही
लगवाई जाएंगी। जमीन के लिए सरकार को पत्र भेजा हुआ है। अप्रूवल मिलते ही
कॉलेज की इमारत का निर्माण कार्य आरंभ किया जाएगा।