पौष्टिकता में सामान्य गेहूं से कठिया गेहूं बेहतर है। विश्व बाजार में इसकी खासी मांग है। भारत इसके उत्पादन में अग्रणी बन सकता है।
वर्तमान में देश में तीन सौ लाख हेक्टेयर में गेहूं की खेती हो रही है, जिसमें से चार प्रतिशत क्षेत्र में कठिया गेहूं का उत्पादन लिया जा रहा है। सामान्य गेहूं से इसके भाव अधिक है। इस कारण भारत का किसान इससे अतिरिक्त लाभ ले सकता है।
चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में कठिया गेहूं पर आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में यह बात सामने आई। गेहूं की इस किस्म की अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भारी मांग के चलते इसकी खेती को किसानों में लोकप्रिय बनाने का आह्वान किया गया।
विवि के अनुसंधान निदेशक डॉ. एस.एस. सिवाच ने बताया कि कठिया गेहूं का पास्ता व मैकरोनी जैसे खाद्य उत्पादों में प्रयोग होने के कारण विश्व बाजार में इसकी बहुत मांग है तथा भारत इसके उत्पादन तथा निर्यात में विश्व में अग्रणी देश बन सकता है।
उन्होंने कहा कि गेहूं कि इस किस्म की मांग के दृष्टिगत केंद्र सरकार ने भी किसानों के लाभ के लिए इसकी खेती को लोकप्रिय बनाए जाने की पहल की है।
हरियाणा तथा पंजाब में बढ़ाया जा सकता उत्पादन
देश के उत्तर दक्षिणी मैदानी इलाकों विशेषकर हरियाणा तथा पंजाब में जहां रोटी के लिए प्रयोग होने वाली गेहूं की किस्मों के अंतर्गत क्षेत्र में से कुछ क्षेत्र पर कठिया गेहूं की खेती करके इसका उत्पादन बढ़ाया जा सकता है।
इससे कृषि का विविधिकरण होने के साथ-साथ किसानों को भी लाभ होगा। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के पास कठिया गेहूं की पर्याप्त किस्में तथा उत्पादन प्रौद्योगिकी उपलब्ध है। गेहूं व जौ अनुभाग के अध्यक्ष डॉ. एस.के. सेठी ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इसका सामान्य गेहूं से 10-15 प्रतिशत अधिक दाम है।
कठिया गेहूं की खेती में नहीं होगी परेशानी
मानव संसाधन प्रबंधन निदेशक डॉ. राम सिंह ने कहा कि कठिया तथा साधारण गेहूं की उत्पादन प्रौद्योगिकी लगभग एक समान है। इसलिए किसानों को कठिया गेहूं की खेती करने में दिक्कत नहीं होगी।
गेहूं विकास निदेशालय के तकनीकी अधिकारी डॉ. पी.पी. सिंह ने कहा कि देश में 300 लाख हेक्टेयर में गेहूं की खेती की जाती है, जिसमें से मात्र 4 प्रतिशत क्षेत्र कठिया गेहूं के अंतर्गत है।
अनुवांशिकी एवं पौध प्रजनन विभाग के अध्यक्ष डॉ. आई.एस. यादव ने कहा कि कठिया गेहूं में प्रोटीन, बीटा किरोटीन तथा मिनरल अधिक मात्रा में होने के कारण पौष्टिकता में यह सामान्य गेहूं से बेहतर है।