108 कुंडीय महायज्ञ किया
मेले के अंतिम दिन पतंजलि योगपीठ व विश्व हिन्दू परिषद ने 108 कुंडीय महायज्ञ किया। इसके बाद स्कूल के बच्चों के लिए नींबू दौड़ व भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। मेले में न्यू यशोदा पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम किए। भारत विकास परिषद की केशव शाखा की तरफ से राम आएंगे भजन संध्या का आयोजन किया गया। इसी दौरान श्रीराम जन्मभूमि पर आधारित डॉक्यूमेंट्री भी दर्शकों को दिखाई गई। इस अवसर पर राज्यसभा सांसद डीपी वत्स, राज्य सूचना आयुक्त डॉ. जगबीर सिंह, मेयर गौतम सरदाना, कृष्ण कुमार, मुकेश बंसल व शांति देवी अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
ये अनुभव किए साझा
- मैं दो बार बाबरी मस्जिद का ढांचा तोड़ने अयोध्या गया था। हिसार से कानपुर तक रेल से गए थे। पूरे कानपुर में पुलिस बल तैनात था। हम छिपकर कानपुर तक पहुंचे और 100 किलोमीटर अयोध्या तक पैदल गए। इस दौरान रास्ते में गांवों में रुकना पड़ता था। रास्ते में हमें बाराबंकी में गिरफ्तार कर लिया गया था। हमें 25 किलोमीटर वापस भेज दिया था ताकि वापस न आ सकें। पुलिस ने अयोध्या के चारों तरफ कांटे के तार लगा रखे थे।
डॉ. विवेक शर्मा
- वर्ष 1989 और 1992 में मैं अयोध्या गया था। वर्ष 1989 में मुझे अलीगढ़ जेल में बंद कर दिया गया था। 28 नवंबर 1992 को अयोध्या पहुंच गए थे। 6 दिसंबर को ढांचा तोड़ने में शामिल था। अयोध्या में सभी मंदिरों के दर्शन करने के लिए जाते थे। उकलाना मंडी से 27 लोग गए थे। अयोध्या जाने के लिए मां-बाप से झगड़ा करके गए था।
कृष्ण भारती, सदस्य, विश्व हिंदू परिषद
- हम हिसार से अयोध्या जा रहे थे, तब हमें पुलिस ने पकड़ लिया था। 4 दिन तक जेल में बंद रखा था। वर्ष 1992 से 96 तक केस चलता रहा। हमने कई दिनों तक सघंर्ष किया था। तब जाकर ढांचा तोड़ने में कामयाब हो पाए थे।
जितेंद्र सोनी, पूर्व जिला प्रधान, विश्व हिंदू परिषद
- जब हम हिसार से अयोध्या जाने की तैयारी कर रहे थे, तब यूपी के सीएम मुलायम सिंह यादव ने कहा था कि मेरे होते हुए अयोध्या में कोई परिंदा भी पर नहीं मार सकता। इस जिद्द के कारण विश्व हिंदू परिषद अयोध्या गया और उस ढांचे को गिराया था।
-डाॅ. जगबीर सिंह
- मैं चार बार अयोध्या गया हूं। वर्ष 1989, 1990 व 1992 जब ढांचा टूटा तब मैं वहां मौजूद था। वर्ष 2001 में गिरफ्तार भी हुआ। विश्व हिंदू परिषद का जिला मंत्री भी रहा हूं। 40 साल से संगठन से जुड़ा हुआ हूं।
-अनिल गोयल
जब से हिसार जिले के सभी गांवाें से शिलाओं को पूजित करवा कर एकत्र किया और उन शिलाओं को अयोध्या ले गए थे। हिसार से अयोध्या के लिए 565 कारसेवकों को अयोध्या आने का बुलावा आया था। 6 दिसंबर 1992 को ढांचे को गिराकर जीत हासिल की।
विजय नागपाल