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जेबीटी, कंडक्टर व पेट्रोल पंप मालिक के बना दिए डिस्ट्रेस राशन टोकन

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खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की ओर से गरीब व वंचित लोगों के लिए जारी किए गए कोविड-19 डिस्ट्रेस राशन टोकन को लेकर ग्रामीण एरिया में भी खामियां सामने आई हैं। शहर के नजदीकी गांव शाहपुर में कई सरकारी कर्मचारियों व जमींदारों के नाम टोकन जारी हुए हैं, जबकि वंचित व गरीब लोगों को नजरअंदाज कर दिया गया है। हालांकि, कर्मचारियों व जमींदारों ने सरकार व विभाग की इस भूल को सुधारते हुए अपना राशन गोशालाओं या जरूरतमंदों को दान कर दिया है।
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सामाजिक कार्यकर्ता रणधीर सिंह बैनीवाल ने बताया कि गांव में जेबीटी टीचर हवासिंह गेदर को टोकन मिला, जिसको उन्होंने सरपंच को वापस कर दिया कि वे राशन नहीं ले सकते। गांव के ही पेट्रोल पंप मालिक हवासिंह बैनीवाल, कंडक्टर रणबीर बैनीवाल ने भी अपना राशन गोशाला में दान कर दिया। देवसिंह राजलीवाल ने अपना राशन जरूरतमंद मजदूर को भेंट कर दिया। उन्होंने बताया कि गांव के ही टीनू बैनीवाल, अजमेर बैनीवाल और व्यापारी राजकुमार राजपूत ने भी अपना राशन दान कर दिया।
डिप्टी स्पीकर से की खामियों की जांच करवाने की मांग
रणधीर सिंह बैनीवाल व अन्य ने सवाल उठाया कि सरकार ने ये टोकन किस आधार पर जारी किए हैं, जो जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पाए। उन्होंने नलवा विधायक एवं डिप्टी स्पीकर रणबीर सिंह गंगवा से मांग की कि इस बात की जांच कराई जाए कि किस बात को आधार मानकर यह राशन टोकन वितरित किए गए हैं। वहीं, जो गरीब व जरूरतमंद इन टोकन से वंचित रह गए हैं, उन्हें जल्द टोकन जारी किए जाएं।
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इससे पहले शहर में भी सामने आ चुका फर्जीवाड़ा
इससे पहले शहरी क्षेत्र में भी डिस्ट्रेस राशन टोकन के नाम पर फर्जीवाड़ा सामने आ चुका है। असली जरूरतमंदों की बजाय कई ऐसे लोगों के नाम टोकन जारी हुए हैं, जिनको वास्तव में राशन की जरूरत ही नहीं थी। इसको लेकर पार्षदों ने भी निगम कमिश्नर के सामने रोष जताया था। वहीं, शहर में हुई खामियों की जांच डीसी ने निगम की ज्वाइंट कमिश्नर को सौंपी हुई है।
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