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रामभगत मलिक बोले - प्रशासन ने जबरदस्ती की तो आंदोलन ले सकता कोई भी रूप

Sat, 04 Jun 2016 01:26 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हिसार
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प्रशासन ने जबरदस्ती की तो आंदोलन ले सकता कोई भी रूप - फोटो : bureau
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अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेश प्रवक्ता रामभगत मलिक ने कहा है कि पांच जून को प्रस्तावित आंदोलन शांतिपूर्वक रहेगा। वे कहीं कोई हिंसा नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि अगर प्रशासन हमारे साथ किसी तरह की जबरदस्ती करता है तो यह आंदोलन भी कोई भी रूप ले सकता है।
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वे जाट धर्मशाला स्थिति अपने कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जबरदस्ती या जाट समुदाय के लोगों के साथ अन्याय होता है तो फिर आंदोलनकारी हमारे से भी बेकाबू हो सकते हैं। पांच जून का धरना प्रदर्शन मय्यड़ में हाईवे के साथ होगा।

22 फरवरी को सरकार ने जो वायदा किया था उस पर सरकार खरी उतरे। हालांकि परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने 130 जाट नेताओं व आंदोलनकारियों पर लगाए गए देशद्रोह के केस में सहानुभूति बरतने की बात कही है। कुछ धाराएं हटाने पर भी बात हुई है। इसके लिए मंत्री ने 15 दिन का समय मांगा है। 15 दिन तक हम लगातार धरना जारी रखेंगे। इसके बाद प्रशासन का रुख देखेंगे। अगर कोई उचित कार्रवाई नहीं हुई तो धरना अनिश्चितकालीन भी हो सकता है।
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...फिर हमारी गाड़ियां क्यों रोकी
जाट नेताओं ने कहा कि जाट आरक्षण आंदोलन को लेकर सरकार अपना प्रचार कर रही है तो जाट संघर्ष समिति अपना प्रचार कर रही है। मगर प्रशासन द्वारा उन्हें क्यों रोका जा रहा है। रामभगत मलिक ने कहा कि उकलाना में वीरवार को उनकी प्रचार के लिए निकली गाड़ी का चालान काट दिया। उस वक्त वे दिल्ली हरियाणा भवन में थे। उन्होंने मौके पर ही बात की। वहां मौजूद आईजी ने स्थानीय प्रशासन से संपर्क किया और इसके बाद उनकी गाड़ी छोड़ दी।

सरकार पर निर्भर वो कैसे हालात चाहती है
पत्रकारों से बातचीत करते हुए जाट नेताओं ने कहा कि यह सरकार पर निर्भर है कि कि वो कैसे हालात चाहती है। संघर्ष समिति तो प्रदेश के जिलों में एक-एक धरना लगाएगी। ये धरना शांतिपूर्वक तरीके से होंगे। अभी तक सरकार ने जाटों के लिए कुछ नहीं किया। धरने हमारे इससे ज्यादा नहीं बढ़ेंगे, एक स्थान पर ही रहेंगे।

सरपंच, पंचों को डराने की कोशिश कर रहा प्रशासन
जाट आरक्षण आंदोलन को लेकर प्रशासन सरपंच व पंचों को डराने की कोशिश कर रहा है। जाट नेताओं ने कहा कि ऐसा कुछ नहीं है, गांवों में अभी भी भाईचारा है। जाट आरक्षण समिति ऐसी कोई हिंसा या उपद्रव नहीं करेगी जिसका समाज पर गलत असर पड़े। पहले भी जाट आंदोलनकारियों ने ऐसा कुछ नहीं किया। उग्र जरूर हुए थे मगर वह प्रशासन ने उकसाया था। हिंसा करने वाले जाट नहीं काई और लोग थे।

ये रहे मौजूद
इस मौके समिति के जिला अध्यक्ष कृष्ण किरमारा, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य चंद्रभान काजला, ईश्वर मोर, राजबीर मलिक, देवीप्रश्न दहिया, रणबीर, जाबरमल, जयमहेंद्र पूनिया, बलवंत सिंह, रणधीर बामल सहित कई जाट नेता मौजूद थे।
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