कर्फ्यू के दौरान जब पेट्रोल पंप बंद थे तो घूर फूंकने के लिए तेल कहां से आया। मेरा शहर जल गया और पुलिस तमाशबीन रही। वित्तमंत्री जी यह कैसा कर्फ्यू था, जिसमें कुछ लोग तो दंगा करते रहे और पीड़ितों को पुलिस मारमार कर घर के अंदर बंद करती रही।
कुछ इसी तरह के तीखे सवालों का वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु को रविवार को सामना करना पड़ा। यहां पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में आयोजित सद्भावना कमेटी की बैठक में भाजपाइयों ने भी तीखे सवाल किए। वार्ड 12 के पार्षद महेंद्र जुनेजा ने भी वित्तमंत्री पर खूब सवाल दागे।
उन्होंने प्रशासन की पोल खोलकर रख दी। वित्तमंत्री के सामने कहा कि सर आप ये बताए कि यह कैसा कर्फ्यू था। हमने तो ऐसा कर्फ्यू पहली बार देखा जिसमें उपद्रवी आ जा रहे थे, दंगा कर रहे थे। पेट्रोल पंप बंद फिर भी आग लगाने वाले ड्रम के ड्रम तेल लेकर आखिर कहां से आ रहे थे, जिन्होंने सब कुछ तहस नहस कर दिया।
सुभाष गुर्जर ने की इस्तीफे की मांग
शांति सद्भावना सभा में पहुंचे सुभाष गुर्जर ने वित्तमंत्री से पूछा कि मंत्री साहब ये तो बताओ सैनियान मोहल्ले और पड़ाव में गुर्जरों के यहां आपने सेना और पुलिस क्यों तैनात कर रखी है। दंगा करने वालों को तो खुला छोड़ते हो और हमारे पर पहरा। शहर के ऐसे हालात हैं कि जनता आपके इस्तीफे की मांग करती है।
इसी दौरान बीजेपी के समर्थकों व पुलिस ने उन्हें पकड़कर बैठा दिया। हालांकि शहर के कुछ पार्षदों ने उनका समर्थन किया और कहा कि इन्हें बोलने दो क्यों रोका जा रहा है। जवाब में वित्तमंत्री ने कहा कि आपकी पीड़ा मैं समझ रहा हूं। आपका गुस्सा जायज है।
पवन गिरधर बोले - हमारा कसूर क्या
व्यापारी पवन गिरधर ने सबसे पहले वित्तमंत्री के सामने सवाल दागे। खड़े होकर भरी सभा में कहा कि मंत्री साहब हमारा आखिर कसूर क्या था कि हमारी दुकानें जला दी। सब तहस नहस कर दिया। क्या व्यापारियों ने आरक्षण में रोड़ा अटकाया था फिर उन्हें क्यों निशाना बनाया। आप ये बताओ अब क्या हमें पूरा मुआवजा मिल जाएगा। जिनका 50 लाख का नुकसान हुआ क्या उनकी पूरी भरपाई कर पाएगी सरकार।
काहलो ने कहा - जिन्हें न्याय नहीं मिला वे मजबूरन बनेंगे अपराधी
राजनेता गुलजार सिंह काहलो ने कहा कि 1984 में जो दंगे हुए थे उनकी आज तक जांच ही चल रही है। न्याय न मिलने वाले लोग उग्रवादी बन गए। सरकार क्या इस मामले में भी ऐसे ही जांच करेगी? ऐसे में न्याय न मिलने वाले युवा अपराध का रास्ता अख्तियार करेंगे।
बिजली, पानी व टैक्स बिल माफ करने की मांग
समाजसेवी राजेंद्र गोदारा ने वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु के सामने मांग उठाई कि जिन लोगों का नुकसान हुआ है। सरकार उनके कुछ वर्षों तक बिजली, पानी व टैक्स बिल माफ करे। क्योंकि उनकी दुकानदारी व धंधे तो अब रहे नहीं वे आखिर ये सब आर्थिक बोझ कैसे उठा पाएंगे। जवाब में वित्तमंत्री ने कहा कि हम इस पर विचार कर रहे हैं।
दीवान बोले, व्यापारियों का ब्याज माफ करे सरकार
पार्षद प्रतिनिधि पंकज दीवान ने कहा कि व्यापारियों ने बैंकों से कर्ज लेकर बिजनेस शुरू किया है। उन पर लाखों का कर्ज है। कोई भी व्यक्ति जो व्यापार चला रहा है उसका धंधा तो चौपट हो ही गया है, वे आखिर कर्ज ब्याज सहित कैसे चुकाएगा। सरकार को उनका ब्याज भी माफ करना चाहिए जो इस दंगे में पीड़ित रहे हैं।
जुनेजा ने विज के बयान को लेकर दागा सवाल
पार्षद महेंद्र जुनेजा ने अनिल विज के बयान को लेकर भी सवाल दाग दिया। उन्होंने कहा कि सर विज साहब कह रहे हैं कि दो जाट मंत्रियों ने सरकार को हाईजैक कर लिया। आखिर ये क्या है। इस पर वित्तमंत्री ने सफाई देते हुए कहा कि आखिर यहां इस तरह के सवाल नहीं होने चाहिए। मगर आपकी जिज्ञासा को शांत करना जरूरी है क्योंकि जनता आपसे भी सवाल पूछती है।
उन्होंने कहा कि वैसे यह मामला मुख्यमंत्री साहब के अधिकार का विषय है। ऐसी बयानबाजी न प्रदेश के हित में है न ही देश के। सीएम साहब ने सारे मामलों पर बात की है। कैबिनेट एक है और कैबिनेट सामूहिक सिद्धांत पर काम करती है।
अचानक पहुंचे मंत्री, आर्मी भी संभाले थी मोर्चा
बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बरला को रतिया में काले झंडे दिखाए जाने के मामले के बाद वित्तमंत्री के पहुंचने से पहले प्रशासन पूरी तरह अलर्ट हो गया। अचानक पहुंचे वित्तमंत्री के आने की सूचना उनके आने से दो घंटे पहले ही मिल पाई। यानी की शहर के ज्यादा लोगों को सुरक्षा की दृष्टि से प्रशासन ने भनक तक नहीं लगने दी।
कहीं वित्तमंत्री का विरोध न हो जाए इसको लेकर वित्तमंत्री के आने से पहले ही आर्मी की दो गाड़ियां भी पहुंच गईं। कहीं से कोई विरोध करने वाले न सभा में घुस जाए इसे ध्यान रखते हुए प्रशासन ने पुख्ता प्रबंध किए हुए थे।