पेट्रोल पंपों पर पिछले तीन दिन से सप्लाई न होने कारण शहर के 7
पंपों पर पेट्रोल खत्म हो गया है। पंप संचालकों ने आउट ऑफ स्टॉक के बोर्ड
टांग दिए हैं।
दूध की आपूर्ति होने से दूध की दिक्कतें भी लोगों को सहनी
पड़ी। हिसार जिले में करीब 159 पेट्रोल हैं, जिनमें से बालाजी पेट्रोल पंप
कैमरी रोड, साईं समराथल फिलिंग स्टेश कैमरी, गोयल ब्रदर्स सिरसा रोड,
पीएलए स्थित बनवारी लाल दुर्गा प्रसाद पंप, राजगढ़ रोड पर लघु सचिवालय
परिसर के पास स्थित इंडियन ऑयल पंप सहित अन्य पंपों पर आउट ऑफ स्टॉक के
बोर्ड टांग दिए गए हैं।
जिले में हर रोज 60 टैंकर तेल लेकर आते हैं। हिसार
में पानीपत रिफाइनरी से पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति होती है। पिछले तीन दिन
से टैंकर नहीं आ पा रहे। रास्ते में फंसे हुए हैं। जिले में प्रतिदिन करीब
12 लाख लीटर तेल की खपत होती है। शुक्रवार को कोई भी गाड़ी तेल लेकर नहीं
पहुंच सकी, जिस कारण पंप संचालकों से वाहन चालक निराश वापस लौट रहे हैं।
पूरा शहर हुआ सील, जनता हुई परेशान
जाट आरक्षण आंदोलन के चलते पूरा शहर सील कर दिया गया है, जिससे शहर का
बाहरी क्षेत्रों से संपर्क पूरी तरह से टूट चुका है। आम जन का आवागमन पूरी
तरह ठप हो गया है।
आज से रोजमर्रा की चीजों के लिए भी संघर्ष करना पड़ सकता
है। दूध, सब्जियां, गैस, पेट्रोल, डाक आदि से संबधित सभी गाड़ियां जाम में
फंसी हुई हैं। औद्योगिक इकाइयों का कच्चा माल रास्ते में फंस गया है,
जिससे उद्योगों से लेकर बाजारों तक नुकसान की खबरें हैं। श्रमिक, कर्मचारी,
अधिकारी अपने काम पर नहीं जा पा रहे हैं।
शहर वालों को दूध नहीं, किसानों को 28 लाख का नुकसान
शहर के दुग्ध संकलन केंद्र में गांवों से आने वाले 70 हजार लीटर दूध की
आपूर्ति दूसरे दिन भी पूरी तरह ठप रही, जिससे गांव के किसानों व दूध
उत्पादकों को प्रतिदिन करीब 28 लाख रुपये का नुकसान हो रहा है।
दुग्ध संकलन
केंद्र के प्रबंधक भूपसिंह गोदारा के अनुसार केंद्र में जिले के विभिन्न
गांवों में स्थित 305 सहकारी समितियों से प्रतिदिन 70 हजार लीटर दूध आता
है। जो पिछले दो दिन से नहीं आ पा रहा है, जिससे दुग्ध केंद्र को भी लाखों
का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
बाजारों में आधी भी नहीं रही सेल
आरक्षण की आग से आम जन जीवन पूरी तरह से ठप हो गया है। बाजार सूने पड़े
हैं। व्यापारियों के अनुसार बिक्री आधी हो गई है। राजगुरु मार्केट एसोशिएसन
के प्रधान सदानंद कामरा ने बताया कि आरक्षण के कारण लगे जाम के चलते
गांवों के ग्राहक नहीं आ पा रहे हैं।
इससे बाजारों की रौनक गायब हो गई है।
शादियों का सीजन होने के कारण अच्छे मुनाफे की उम्मीद थी। दो दिन से बिक्री
40 से 50 प्रतिशत घट गई है। इसके अलावा बाजारों में आने वाले माल की
गाड़ियां भी रास्ते में ही फंसी हुई हैं। मार्केट का लगभग सामान दिल्ली और
यूपी से आता है, जो नहीं आ पा रहा है।
रोजी-रोटी के पड़े लाले
प्रतिदिन शहर से सैकड़ों मजदूर आसपास के क्षेत्रों में मजदूरी के लिए जाते
हैं। बाहर से रोजी-रोटी कमाने के लिए शहर में आते हैं। आरक्षण आंदोलन के
कारण ये सब श्रमिक अपने काम पर नहीं जा पा रहे हैं, जिससे उनको रोजी-रोटी
के लाले पड़ रहे हैं। परिवार का गुजारा चलाना मुश्किल हो रहा है।
सब्जियों के बिना मंडी भी सूनी
शहर के सील होने के चलते फल-सब्जियों का स्टॉक लगभग खत्म हो गया है।
गाड़ियां नहीं आ पा रही हैं, जिससे शहर के लोगों को बड़ी मुश्किल का सामना
करना पड़ सकता है।
सब्जीमंडी के प्रधान मोहनलाल सैनी ने बताया कि स्टॉक
लगभग खत्म हो चुका है। अगर रात में किसी तरह से गाड़ियां पहुंच पाती हैं तो
काम चल सकता है।
वर्ना कल पूरे शहर को सब्जी मिलना मुश्किल है। प्रतिदिन
करीब 70 गाड़ियां यहां फल-सब्जियों से भरकर आती हैं, लेकिन पिछले तीन दिन
से गाड़ियां नहीं पहुंच पा रही हैं। लाखों का माल रास्ते में अटका हुआ है,
जिससे करीब 30 लाख का नुकसान प्रतिदिन हो रहा है। वहीं किसानों को प्रतिदिन
20 लाख का नुकसान हो रहा है।