हिसार। पूर्व दवा नियंत्रक अधिकारी (डीसीओ) सुरेश चौधरी के खिलाफ करीब साढ़े तीन साल पुराने दो बंद मामले हिसार पुलिस ने फिर से खोल दिए हैं। होलसेल मेडिकल हॉल का लाइसेंस जारी करवाने के लिए आवेदक से 40 हजार रुपये की रिश्वत मांगने के मामले में सुरेश चार्जशीट किया गया है।
इससे पूर्व हिसार पुलिस ने दोनों मामले बंद करके अदालत में अपनी क्लोजर रिपोर्ट जमा करवा दी थी और शिकायतकर्ता के खिलाफ अदालत ने झूठी शिकायत देने के आरोप में कार्यवाही शुरू करने के आदेश दे दिए थे, लेकिन मुख्यमंत्री उड़नदस्ता की टीम ने दोनों मामलों की जांच में कोताही पकड़ी थी और फिर सीआईडी के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) के पत्र के आधार पर पुलिस ने अब दोनों मामलों की जांच फिर से शुरू कर दी है। वहीं, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने शिकायतकर्ता के खिलाफ झूठी शिकायत देने के आरोप में कार्यवाही शुरू करने के आदेश को खारिज कर दिया।
आरोप है कि डीसीओ सुरेश चौधरी ने 19 सितंबर, 2017 को ऋषि नगर निवासी हनुमान की बुधला संत मंदिर के पास शिव शक्ति मेडिकल हॉल का मुआयना किया और एक साल बाद 10 सितंबर, 2018 से 19 सितंबर, 2018 तक दवा दुकान का लाइसेंस निलंबित कर दिया गया। 20 सितंबर, 2018 को जब हनुमान अपने साथी विनोद के साथ डीसीओ के कार्यालय में दुकान खोलने की सूचना देने गए तो डीसीओ ने 20 हजार रुपये मासिक रिश्वत मांगी। जब देने से मना कर दिया तो सुरेश उसी दिन दोपहर को अपनी टीम के साथ दुकान पर आया और हनुमान के चालक अनुसूचित जाति के भागीरथ को अन्य लोगों की अनुपस्थिति में जातिसूचक गालियां दी और मारपीट की। विरोध करने पर हनुमान के साथ भी मारपीट की और दुकान सील कर दी जिसको 5 अक्तूबर को रिलीज किया गया, लेकिन यह सारा मामला सीसीटीवी में कैद हो गया। रिश्वत मांगने और जातिसूचक गालियां देकर मारपीट करने के आरोप में 16 अक्तूबर, 2018 को पुलिस अधीक्षक को शिकायत की, लेकिन कोई एफआईआर दर्ज नहीं की। इसके बाद अदालत के आदेश पर शहर थाना पुलिस ने जनवरी, 2019 को एफआईआर नंबर 19 व 28 दर्ज की। पुलिस ने भ्रष्टाचार अधिनियम की एफआईआर नंबर 19 को झूठा बताकर अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी जिसके बाद अदालत ने शिकायतकर्ता के खिलाफ के तहत कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं।
इन आदेशों के खिलाफ पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की तो कोर्ट ने हिसार पुलिस ने मामले की स्टेट्स रिपोर्ट मांगी। इस पर डीएसपी अशोक कुमार ने हाईकोर्ट के जस्टिस अवनीश झिंगन की अदालत में शपथ पत्र दाखिल कर बताया कि सीआईडी के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ने 24 सितंबर, 2021 को कहा कि शहर थाना की वर्ष 2019 की एफआईआर नंबर 19 व 28 को मुख्यमंत्री उड़नदस्ता की टीम ने जांच की। जांच के दौरान मामले के अनुसंधान में कुछ कोताही पाई गई। इसलिए उन्होंने नए सिरे से जांच की जरूरत है। इसके बाद डीएसपी जोगेंद्र शर्मा को दोनों मामलों को नए सिरे से अनुसंधान करने के लिए नियुक्त किया गया। इस आधार पर न्यायाधीश ने शिकायतकर्ता के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 182 के तहत कार्यवाही शुरू करने के जिला अदालत के आदेश को खारिज कर दिया। बता दें कि डीसीओ सुरेश चौधरी के खिलाफ 21 अगस्त को ही 40 हजार रुपये की रिश्वत मांगने के मामले में पुलिस ने चार्जशीट अदालत में दायर की थी। इस मामले में 17 अक्तूबर से गवाही होनी है।