हांसी। शहर में बढ़ रहे डॉग व मंकी बाइट के केसों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। नागरिक अस्पताल में पिछले दो महीनों में 725 लोग एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवा चुके हैं। इसमें से सबसे ज्यादा मामले 656 केस डॉग बाइट के हैं व 46 केस मंकी बाइट के हैं, लेकिन इस समय सबसे ज्यादा आवारा कुत्तों से परेशानी चिंता का विषय है।
इन घटनाओं के पीछे की मूल वजह शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या है। शहर के गली कूचों से लेकर चौड़ी सड़कों पर आवारा कुत्तों का जमावड़ा रहता है। ये राहगीरों को आसानी से निशाना बना लेते हैं, जिसमें कई बार पीड़ित गंभीर घायल हो जाता है। सबसे पहले बच्चे व बुजुर्ग आवारा कुत्तों की चपेट में आते हैं। सबसे ज्यादा डॉग बाइट केस बच्चों व बुजुर्गों के ही हैं। खासकर रात के समय कुत्ते गली में किसी अन्य व्यक्ति के घुसते ही हमलावर हो जाते हैं।
घाव को पहले धोएं
नागरिक अस्पताल के चिकित्सक डॉ. कामिद मोंगा का कहना है कि डॉग बाइट के मामले में लोगों को प्राथमिक एहतियात जरूरी है। सबसे पहले घाव को साबुन और पानी से धोएं। उस पर पट्टी नहीं बांधे। अगर ज्यादा खून बहे तो ही पट्टी बांधे। उसके बाद एंटी रेबिज इंजेक्शन लगवाएं। चार बार इंजेक्शन लगाया जाता है।
खत्म हो चुका है बंदरों को पकड़ने का टेंडर
नगर परिषद ने बीते वर्ष बंदरों को पकड़ने का टेंडर दिया था। बंदरों को पकड़ने के लिए मथुरा से एक्सपर्ट आए थे। जिन्हें एक वर्ष में शहर में 2500 बंदर पकड़ने का टेंडर दिया गया था। यह टेंडर अब खत्म हो गया है, लेकिन बंदरों की संख्या फिर से बढ़ने लगी है।
नहीं है आवारा कुत्तों को पकड़ने का टेंडर
नगर परिषद ने करीब 8 से 10 वर्ष पहले शहर में आवारा कुत्तों को एंटी रेबिज इंजेक्शन लगवाने का काम एक एनजीओ को दिया था। उसके बाद से शहर में आवारा कुत्तों की समस्या पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है।
शहर में कुत्तों को एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने के लिए पशु चिकित्सालय के अधिकारियों से बातचीत करेंगे। ताकी समस्या का समाधान हो सके। - डॉ. सुरेश चौहान, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद, हांसी।