हांसी (हिसार)। राजस्थान की फाइनेंस कंपनी से ग्रुप लोन के नाम पर 39 फर्जी आवेदक बनाकर कंपनी के फील्ड ऑफिसर, दो महिलाओं सहित चार लोगों ने 19.33 लाख रुपये हड़प लिए। चारों ने फर्जी दस्तावेज तैयार करके कंपनी के साथ षड्यंत्र रचकर धोखाधड़ी की। नौ माह की जांच के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया है।
शिकायत में जयपुर के तहसील चोमू के जोधपुरी ढाणी निवासी सुरेंद्र ने बताया कि वह दिगंबर कैपफिन फाइनेंस लिमिटेड कंपनी के सीनियर सर्कल का मैनेजर है। उनकी कंपनी भारतीय रिजर्व बैंक से पंजीकृत है और पूरे भारत में लोन देने के कारोबार के लिए कंपनी को आरबीआई का लाइसेंस मिला हुआ है। कंपनी जरूरतमंद महिलाओं को उचित प्रक्रिया या औपचारिकताओं के बाद लघु उद्योग आदि के लिए ग्रुप लोन देने का काम करती है। रवि कंपनी में फील्ड ऑफिसर पद पर कार्यरत था।
हांसी व आसपास के क्षेत्रों में जाकर महिलाओं से संपर्क करके उनके दस्तावेज लेने और अन्य औपचारिकताएं पूरी करने का कार्य करता था। जनवरी 2022 से मई 2022 तक रवि ने कंपनी के कार्यालय में 67 आवेदन ग्रुप लोन के लिए जमा करवाए, जिसकी रिपोर्ट पर 67 आवेदकों को लोन दे दिया गया। लोन की राशि आवेदकों के बैंक खाता में कंपनी द्वारा जमा करवा दिया गया। इसके बाद जब लोन वापसी की किस्तें आवेदकों द्वारा समय पर जमा नहीं करवाई गई ,तब कंपनी के एरिया मैनेजर व अन्य कर्मचारी आवेदकों के पास किस्त की अदायगी के लिए गए। तब कम्पनी को पता चला कि 67 आवेदनों में से 39 आवेदन फर्जी दस्तावेज व पहचान पत्र, रिहायशी सबूत आदि के आधार पर दिए गए हैं।
कंपनी द्वारा की गई जांच में पता लगा कि सारी धोखाधड़ी कंपनी के ही कर्मचारी रवि व आवेदक निशा, बबली, सारस ने षड्यंत्र रचकर की है। पुलिस ने जगदीश कॉलोनी निवासी बबली, लक्ष्मण चौतरा क्षेत्र निवासी निशा, झूंझुनू निवासी रवि, पंजाब के फिरोजपुर निवासी सारस के खिलाफ धोखाधड़ी व विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
इस मामले में कंपनी के अधिकारी द्वारा एसपी को अक्तूबर 2022 में शिकायत दी गई थी। आर्थिक अपराध शाखा ने जांच की। जांच के बाद अब मामला दर्ज करने की अनुशंसा की गई। निशा महिलाओं को बहला फुसलाकर उनसे दस्तावेज लेती थी। सारस का काम फर्जी केवाईसी बनवाने का काम है। रवि फर्जी और झूठे तौर पर दस्तावेजों की तस्दीक करता था। कंपनी का आरोप है कि यह चारों कई अन्य कंपनी में भी धोखाधड़ी कर चुके हैं।