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Hisar News: आर्यनगर में स्टेट हाईवे पर एक तरफ का पानी निकाला, मिले गहरे गड्ढे, दूसरी ओर हालात जस के तस

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हिसार। घग्गर ड्रेन टूटने से आर्यनगर और इसके बीचों-बीच गुजर रहे हिसार-बालसमंद-भादरा स्टेट हाईवे पर बीते 25 दिनों से भरे हुए पानी को अब तक पूरा नहीं निकाला जा सका है। गांव में भरे पानी को निकालने के लिए औपचारिकता जारी है, लेकिन स्टेट हाईवे पर करीब आधा किलोमीटर क्षेत्र में भरे पानी की निकासी की किसी ने सुध नहीं ली।
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आक्रोश बढ़ा तो बुधवार को प्रशासन ने ग्राम पंचायत की मदद से एक तरफ के रोड का पानी निकलवाना शुरू किया। पानी कम होते ही यहां एक से डेढ़ फीट गहरे गड्ढे निकल आए। इनसे सैकड़ों गाड़ियों के बंपर और एक्सेल टूट चुके हैं। अब इन गड्ढों को भरा गया तो कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन रोड के दूसरी तरफ भरे करीब डेढ़ फीट पानी की स्थिति ज्यों की त्यों बनी हुई है।
इस पानी को निकालने में लंबा समय लग सकता है। इस तरफ से पानी निकाला गया है उस ओर रिहायशी मकान हैं। जहां अभी अभी भी पानी भरा हुआ है उस ओर खेत हैं। ड्रेन टूटने पर जब गांव में पानी भरा तो इस खेत में करीब तीन एकड़ जमीन पर मेढ़ बना दी जाती थी। रोड को पानी भरने से बचाया जा सकता था, लेकिन नहीं बनाई गई। कुछ दिन बाद रोड पानी से लबालब हो गया। इस लापरवाही का खामियाजा हजारों लोग भुगत चुके हैं।
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बिजली मोटर के भरोसे गांव के पानी की निकासी
स्टेट हाईवे पर भरे पानी की सुध लेना तो दूर की बात रही। गांव में भरे पानी की निकासी भी बिजली मोटर से की जा रही है। बीते करीब 15 दिनों से आर्यनगर के जलघर के पास दो पाइप बिजली मोटर से जोड़कर ड्रेन में पानी डाला जा रहा है। बिजली सप्लाई कट लगने पर और रात के वक्त यह मोटर बंद रहती है। जनरेटर की व्यवस्था न होने से पानी की निकासी बेहद कम है। यही वजह है कि 25 दिनों से आर्यनगर के जलघर, सरकारी स्कूल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और पशु अस्पताल में भरा हुए पानी की स्थिति जस की तस बनी हुई है।

13 दिन पहले रास्ता बंद होने का लगाया था नोटिस

दिल्ली से हिसार के रास्ते श्रीगंगानगर तक जाने वाला यह स्टेट हाईवे हाल में ही 26 करोड़ की लागत से बनकर तैयार हुआ था। पानी भरने से गड्ढे बने तो लगातार हो रहे हादसों को देख करीब 13 दिन पहले इस रोड को बंद किए जाने के बोर्ड लगा दिए गए। इसके कारण लोगों ने लुदास और अन्य रास्तों से आवगमन शुरू कर दिया। कुछ लोगों ने यह वैकल्पिक रास्ता लंबा होने से इसी स्टेट हाईवे से ही आना जाना जारी रखा। इससे कभी वाहन पलटे तो कभी बंपर टूटने और नीचे की ओर से गाड़ियां नीचे टकराने से बड़ी क्षति झेली, जो अभी भी जारी है।

15 साल पहले निकाली गई ड्रेन बनी बाढ़ का कारण

हिसार से बालसमंद का क्षेत्र बारानी माना जाता है। बारिश कम होती है। तकरीबन 15 साल पहले आर्यनगर से घग्गर ड्रेन निकाली गई थी। सालों तक इसमें गंदे नाले का पानी बहता रहा। किसी को यकीन नहीं था कि इस ड्रेन में इतनी मात्रा में पानी आ सकता है। इस बार स्थिति बदली और ड्रेन ओवरफ्लो होकर टूट गई और आर्यनगर, कैमरी, गंगवा, हिंदवान, टोकस-पातन, बस्ती समेत करीब 15 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए। अब खेतों और गांवों में भरे पानी का रंग काला पड़ चुका है और सड़ रहा है। बीमारी फैलने का डर भी बना हुआ है।

मंत्री की ससुराल और विधायक का गांव है आर्यनगर

आर्यनगर गांव हमेशा चर्चा में रहा है। लंबे समय से इस क्षेत्र के विधायक रहे और वर्तमान में पीडब्ल्यूडी एवं पब्लिक हेल्थ मंत्री रणबीर सिंह गंगवा की ये ससुराल है और आदमपुर के विधायक चंद्रप्रकाश का गांव है। इसके अलावा नलवा विधानसभा से भाजपा विधायक रणधीर पनिहार का गांव भी कुछ किलोमीटर दूर है। पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल के सबसे करीबी व दाहिना हाथ माने जाने वाले और राजनीति के पंडित, दो बार राज्यसभा सदस्य रहे रामजीलाल इसी गांव से थे। फिर भी समस्या का निदान नहीं हो सका है।
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