नगर निगम की मंगलवार को हुई हाउस की बैठक में सात करोड़ के काम (एसएफसी सीएफसी और डी प्लान की ग्रांट) के टेंडर अलॉट होने के बावजूद वर्क ऑर्डर जारी न करने का मुद्दा उठा। पार्षदों ने कहा कि निगम टेक्निकल दिक्कत आने की बात कह कर देरी पर देरी कर देते हैं। इतना ही नहीं शहर की जनता के सामने हमें झूठ बोलना पड़ता है।
परेशानी अधिकारी दे रहे हैं, दंड जनता और पार्षदों को भुगतना पड़ता है। इस पर निगम कमिश्नर एवं डीसी चंद्रशेेखर खरे ने एक्सईएन रामजीलाल से पूछा क्यों नहीं कर रहे वर्क ऑर्डर जारी। जब एक महीने से ज्यादा समय टेंडर अलॉट होने को हो चुके हैं तो क्या प्रॉब्लम है। उन्होंने कहा कि यह कतई सहन नहीं होगा। इससे निगम की छवि खराब होती है। आप क्यों देरी कर रहे हैं। टेंडर अलॉट होते ही दो दिन के अंदर वर्क ऑर्डर मिल जाने चाहिए।
टेक्निकल स्टाफ ने कहा - नेट की समस्या थी, डीसी ने कहा 4 जी का कनेक्शन ले लो
साढ़े चार करोड़ से अधिक के एसएफसी सीएफसी की ग्रांट व सवा दो करोड़ से अधिक डी प्लान के टेंडर लगने के बाद वर्क ऑर्डर ने मिलने का मुद्दा जैसे ही हाउस में उठा टेक्निकल ब्रांच के अधिकारी बगलें झांकने लगे। अधिकारियों ने कहा कि सर नेट की समस्या आ गई थी। हमने बीएसएनएल को भी लिखकर दिया मगर समस्या ठीक नहीं हो पाई। इसके कारण थोड़ी देरी हो गई थी। इस पर पार्षद नरेंद्र शर्मा ने साफ कहा कि सर ये झूठ बोल रहे हैं। हमें जहां तक जानकारी थी इनका कंप्यूटर ऑपरेटर फरलो पर था। इस पर अधिकारी ने सख्ती से कहा कि ये ठीक नहीं। दो दिन के अंदर वर्क ऑर्डर हर हाल में जारी हो जाने चाहिए। आपको नेट की दिक्कत है तो आप 4 जी कनेक्शन ले लो।
अमर उजाला ने उठाया था मुद्दा
अमर उजाला ने शहर के विकास कार्य में अधिकारी बाधा बन रहे हैं इस बात को लेकर मुद्दा उठाया था। वर्क ऑर्डर न मिलने के चक्कर में कहीं डी प्लान का पैसा भी लैप्स न हो जाए इस मुद्दे को भी उठाया था। इसके बाद जिला प्रशासन हरकत में आया है।