यदि मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। एक दिन कामयाबी भी जरूर मिलेगी। ऐसा ही उदाहरण है सेक्टर-16 निवासी कराटे खिलाड़ी निकिता का। निकिता की शुरू से ही कराटे सीखने की रुचि थी, लेकिन जब पिता ने खेलने से मना कर दिया तो वह जिद पर अड़ गई। आज जब वह देश की झोली में पदक डाल रही है तो पिता फूले नहीं समा रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि अब निकिता नेशनल गेम्स में पंच, किक और ब्लॉक का दम दिखाएगी। हालांकि अभी कोरोना वायरस के चलते गुवाहाटी में होने वाले नेशनल गेम्स कुछ समय के लिए स्थगित हो गए हैं। निकिता ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी कराटे चैंपियनशिप (टीम गेम) में स्वर्ण पदक और व्यक्तिगत स्पर्धा में कांस्य पदक जीत चुकी है। निकिता सेक्टर-15 में कोच विजेता मुंदलिया के पास कई सालों से प्रशिक्षण ले रही है। वह इंपीरियल कॉलेज में बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा है।
पिता चलाते हैं गाड़ी तो माता घर-घर जाकर कर रहीं प्राथमिक उपचार
निकिता के पिता पुन्नू गाड़ी चलाते हैं तो उनकी माता घर-घर जाकर प्राथमिक उपचार कर रही हैं। निकिता ने बताया कि वर्ष 2014 में उन्होंने स्कूल से ही कराटे का प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया था। घर की कुछ समस्या के कारण दो साल तक कराटे से दूरी बनाई रखी। उसके बाद जब वर्ष 2017 में निकिता ने दोबारा प्रशिक्षण लेना शुरू किया तो पिता ने खेलने ने मना कर दिया, लेकिन निकिता ने कराटे में भविष्य बनाने की ठान ली और वह खेलने की जिद पर अड़ गई। अब निकिता तीन साल से लगातार कराटे का प्रशिक्षण ले रही है।
निकिता की उपलब्धियां
- 2018 में स्टेट कराटे चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक
- 2019 में ओपन इंटरनेशनल कराटे चैंपियनशिप में कांस्य पदक
- 2019 में ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी कराटे चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक
निकिता का शुरू से ही उम्दा प्रदर्शन रहा है। वह अब तक कई पदक जीत चुकी हैं। काफी सालों से निकिता मेरे पास ही प्रशिक्षण ले रही है।
- विजेता मुंदलिया, कोच, कराटे प्लेनेट, हिसार