हरियाणा सिविल मेडिकल एसोसिएशन के जिला प्रधान डॉ.राजीव डाबला ने बताया कि दो साल पहले मुख्यमंत्री ने स्पेशलिस्ट कैडर की घोषणा की थी। दो साल बीत जाने के बाद भी इस घोषणा को लागू नहीं किया गया। सरकारी अस्पतालों में स्पेशलिस्ट की कमी है, जो स्पेशलिस्ट हैं उनकी ड्यूटी कभी पोस्टमार्टम में लगा दी जाती है तो कभी अदालत में जाना पड़ता है। ऐसे में ओपीडी प्रभावित होती है।
रोजाना करीब 1200 मरीज आते हैं
जिले के सबसे बड़े नागरिक अस्पताल में हर रोज करीब 1200 से अधिक मरीज दवा लेने के लिए आते हैं। पूरे जिले की बात करें तो रोजाना करीब 2000 मरीज सरकारी अस्पतालों में दवा लेने के लिए आते हैं। बुधवार को 800 लोगों ने ओपीडी की पर्ची कटवाई। अस्पताल में 6 कंसलटेंट डॉक्टर उपलब्ध थे। चिकित्सकों की हड़ताल के चलते मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। दिनभर मरीज डॉक्टर के आने का इंतजार करते रहे। चिकित्सकों की हड़ताल के चलते पीएमओ डॉ. रत्ना भारती ने मेडिकल कॉलेज अग्रोहा से करीब 10 चिकित्सक ओपीडी के लिए बुलाए। करीब ढाई बजे अग्रोहा के डॉक्टरों की टीम नागरिक अस्पताल पहुंची और तीन बजे तक ओपीडी देखी।
प्रमाणपत्र बनवाने को भटकते नजर आए दिव्यांग
हर बुधवार को नागरिक अस्पताल में दिव्यांगों के मेडिकल प्रमाणपत्र बनवाने का कैंप लगता है। इस कैंप के दौरान संबंधित चिकित्सक दिव्यांगों की जांच करते हैं और उसके बाद उनके मेडिकल प्रमाण पत्र बनाए जाते हैं। मेडिकल प्रमाण पत्र में आधार पर ही दिव्यांग की पेंशन निर्धारित की जाती है। बुधवार को चिकित्सकों की हड़ताल के चलते दिव्यांगों के मेडिकल प्रमाण पत्र भी नहीं बने। ऐसे में दूरदराज से आए दिव्यांग और उनके परिजनों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।
80 किलोमीटर दूर से पहुंचे
गांव दनौदा से पहुंचे बलबीर ने बताया कि वह उसकी बेटी नीता का दिव्यांग प्रमाणपत्र के लिए आया था। चिकित्सकों की हड़ताल के कारण सुबह 9 बजे से यहीं बैठे हैं। गांव यहां से 80 किलोमीटर दूर होने के कारण किराया भी बहुत लगता है।
2 घंटे से कर रहे इंतजार
गांव खांडाखेड़ी से पहुंची बिमला ने कहा कि अपने पति सुरेंद्र के दिव्यांग प्रमाणपत्र के लिए आई थी। यहां आकर पता चला कि चिकित्सक हड़ताल पर है। इस दौरान ऑटो में आने पर काफी किराया लगा। आने-जाने में परेशानी हुई और प्रमाणपत्र के लिए मेडिकल भी नहीं हो पाया। अब अस्पताल के दोबारा चक्कर काटने पड़ेंगे।
बाहर से करवाना पड़ेगा अल्ट्रासाउंड
गांव खरड़ से पहुंची सुशील का कहना है कि वह सुबह साढ़े आठ बजे अल्ट्रासाउंड के लिए अस्पताल पहुंची थी। उसका कहना है कि यहां आने पर पता चला कि चिकित्सक हड़ताल पर बैठे हैं। 4 घंटे अल्ट्रासाउंड के लिए इंतजार किया, लेकिन अब बाहर से ही अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ेगा।
थायराइड की दवा लेने पहुंची कमलेश ने बताया कि सुबह 8 बजे अस्पताल पहुंची थी। डॉक्टर को जब रिपोर्ट दिखाने के लिए गई तो पता चला कि वह हड़ताल पर हैं। ऐसे में अब दोबारा अस्पताल आना पड़ेगा।