हिसार। जिला नागरिक अस्पताल में वेंटिलेटर सुविधा नहीं मिलने से नवजात की मौत के मामले में हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने इसे स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर चूक मानते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग समेत छह संबंधित प्राधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। मामले की अगली सुनवाई 1 सितंबर को होगी।
हरियाणा मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा, न्यायिक सदस्य कुलदीप जैन और सदस्य दीप भाटिया की पीठ ने अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य), महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं, पीजीआईएमएस रोहतक, महाराजा अग्रसेन मेडिकल कॉलेज अग्रोहा, सिविल सर्जन हिसार और जिला चिकित्सा लापरवाही बोर्ड को नोटिस जारी किए हैं। आयोग ने नवजात की मौत के कारणों, वेंटिलेटर सुविधा उपलब्ध नहीं होने की वजह और मामले में की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी है।
24 घंटे अस्पतालों के चक्कर लगाता रहा परिवार
हिसार की महाबीर कॉलोनी निवासी राकेश की पत्नी पूजा ने 2 जुलाई को जिला नागरिक अस्पताल में सीजेरियन ऑपरेशन से नवजात को जन्म दिया था। जन्म के बाद शिशु को सांस लेने में गंभीर परेशानी हुई और उसे एनआईसीयू में वेंटिलेटर की आवश्यकता पड़ी, लेकिन अस्पताल में उपलब्ध एकमात्र नवजात वेंटिलेटर पहले से उपयोग में था।
इसके बाद शिशु को अग्रोहा मेडिकल कॉलेज और फिर पीजीआईएमएस रोहतक रेफर किया गया, लेकिन वहां भी आवश्यक सुविधा नहीं मिल सकी। अंत में परिजन उसे निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। परिजनों का आरोप है कि वे करीब 24 घंटे तक उपचार के लिए अलग-अलग अस्पतालों के चक्कर लगाते रहे।
रेफरल व्यवस्था पर जताई चिंता
आयोग ने कहा कि गंभीर मरीज को रेफर करने से पहले संबंधित अस्पताल में आवश्यक चिकित्सा सुविधा की उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है। बिना पुष्टि के मरीज को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भेजना आपातकालीन स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर कमी को दर्शाता है। आयोग ने राज्यभर में आईसीयू, एनआईसीयू और वेंटिलेटर की उपलब्धता की निगरानी के लिए एकीकृत व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। आयोग ने कहा कि समय पर जीवन रक्षक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत जीवन के अधिकार का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
आयोग ने मांगी ये जानकारी
एनआईसीयू और वेंटिलेटर की उपलब्धता व कार्यशील स्थिति
घटना के समय अस्पतालों में चिकित्सा संसाधनों की वास्तविक स्थिति
मरीज को रेफर करने की प्रक्रिया और उसका पालन
मामले की जांच की प्रगति रिपोर्ट
लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदारी तय करने और कार्रवाई का विवरण