हुडा सेक्टर के निवासियों को इस बार पानी के बिल पांच गुना अधिक आए हैं। उपभोक्ताओं को 3 से 4 हजार रुपये तक के पानी बिल आए हैं। अब तक उपभोक्ताओं को 500 से 800 रुपये तक के बिल आते थे। हुडा की ओर से निजी कंपनी को काम सौंपे जाने के बाद यह बिल आए हैं।
हुडा प्रशासक ने कुछ महीने पहले निजी कंपनी को पानी के बिल की रीडिंग का काम सौंपा था। जिसके बाद निजी कंपनी ने पूरे हरियाणा में काम संभाल लिया। हुडा के सभी प्रमुख सेक्टर के लिए करीब दो महीने पहले कंपनी के कर्मचारी आ गए थे। पहले महीने पुराने तरीके से ही बिल भेजे गए। इस बार कंपनी की ओर से नए सॉफ्टवेयर के साथ कर्मचारी घर-घर रीडिंग के लिए भेजे गए। कर्मचारियों ने मीटर की रीडिंग को मोबाइल के जरिए स्कैन किया। इसके बाद मौके पर ही बिल बनाकर उपभोक्ताओं को थमाए। हुडा की ओर से पानी के रेट बिना बढ़ाए ही उपभोक्ताओं को कई कई गुना बिल आए हैं, जिसके बाद उपभोक्ता शिकायत लेकर हुडा दफ्तर पहुंच रहे हैं। यहां भी लोगों को राहत नहीं मिल पा रही। निजी कंपनी ने अभी बिल भेजना शुरू ही किया है। उपभोक्ताओं को इस महीने पानी का बिल भी झटका देने वाला है।
3210 रुपये का बिल थमाया
अर्बन इस्टेट मकान नंबर 1106 निवासी बीके भुटानी ने बताया कि उन्हें 3210 रुपये का बिल थमाया गया है। पिछले लंबे समय से दो महीने में औसतन 500 से 700 रुपये का बिल आता था। इस बार पांच गुना अधिक बिल आने से बेहद परेशान हैं। रीडिंग नोट न करने की गलती हमारी नहीं थी। हुडा कर्मचारियों की गलती के कारण हमें बेहद परेशानी सहनी पड़ रही हैं। इसी तरह दर्जनों अन्य उपभोक्ता भी शुक्रवार को हुडा दफ्तर के चक्कर लगा रहे थे।
मर्जी से भर देते थे रीडिंग
हुडा सेक्टरों में करीब 15 हजार पानी कनेक्शन हैं, जिनकी रीडिंग के लिए महज तीन कर्मचारी थे। कर्मचारी उपभोक्ताओं के घर जाकर रीडिंग नोट कर बिल बनाने की बजाए अपनी मर्जी से औसतन रीडिंग देकर बिल बना देते थे। मौके पर रीडिंग कुछ और ही रहती थी। यह अंतर इतना हो गया कि अब वास्तविक रीडिंग आई तो उपभोक्ताओं को हजारों के बिल मिल गए।
कहां कहां एरिया
रिहायशी - सेक्टर 1-4, सेक्टर 3, सेक्टर 5, सेक्टर 9-11, सेक्टर 13, सेक्टर 14, सेक्टर 15, सेक्टर 16-17, अर्बन इस्टेट, पीएलए
कामर्शियल - अर्बन इस्टेट दो, ग्रीन स्कवायर मार्केट, रेड स्कवायर मार्केट, पीएलए
इंडस्ट्रियल सेक्टर - सेक्टर 27-28
हुडा मुख्य प्रशासक की ओर से प्रदेश स्तर पर फैसला लिया गया था, जिसके अनुसार निजी कंपनी के कर्मचारी बिल बनाकर भेज रहे हैं। साफ्टवेयर के जरिए मौके पर बिल के फोटो लेते ही हुडा दफ्तर में लगे कंप्यूटर में आ रहे हैं। अब रीडिंग में किसी तरह की हेरफेर नहीं हो सकती।
- अमित कुमार, एसडीओ, हुडा