हिसार। कोरोना को मात देने में हिसार का नाम भी जुड़ गया है। कोरोना को हराने के लिए बनी तीसरी वैक्सीन को विकसित करने वाले डीआरडीओ के चीफ साइंटिस्ट डॉ. सुधीर चांदना हिसार में जन्मे थे। हिसार में रहने वाले उनके बड़े भाई-भाभी जल्द ही उनको आशीर्वाद देने के लिए दिल्ली जाएंगे। अपने बड़े भाई विनित चांदना से बात करते हुए डॉ. सुधीर चांदना ने कहा कि भाई मैंने आखिर जंग जीत ली है, मतलब कोरोना को हराने के लिए वैक्सीन बना ली है।
हिसार के सेक्टर 13 में रहने वाले विनित चांदना के छोटे भाई सुधीर चांदना ने दुनिया को बड़ा उपहार दिया है। कोरोना की तीसरी स्वदेशी वैक्सीन को विकसित करने वाले डॉ. सुधीर चांदना के बारे में उनके बड़े भाई विनित चांदना ने बताया कि वह शुरुआत से ही रिसर्च के क्षेत्र में जाना चाहते थे। विनित ने बताया कि वह एसबीआई से वीआरएस ले चुके हैं। उन्होंने बताया कि सुधीर का जन्म हिसार में ही हुुुआ था। पिता जेडी चांदना जज होने के कारण उनका अलग-अलग शहरों में तबादला होता रहता था। इस कारण सुधीर की स्कूली व कॉलेज की पढ़ाई अलग अलग शहरों में हुई। अपना कॉलेज की पढ़ाई चंडीगढ़ से पूरी की। एमएससी इन जेनेटिक्स वर्ष 1989-90 में हिसार के एचएयू से की थी। एमएससी करने के बाद उन्होंने डीआरडीओ में ज्वाइन कर लिया था। अपने सेवाकाल में वह यंग साइंटिस्ट का अवॉर्ड भी जीत चुके हैं। नौकरी करते हुए ही उन्होंने अपनी पीएचडी पूर की। उनका शुरुआत से ही रिसर्च में जाने का मन था। इस कारण उन्होंने डीआरडीओ को कॅरिअर के तौर पर चुना। उनमें काम करने की एक धुन है। जिस काम में लग जाएं उसको पूरा करके ही दम लेते हैं।
शनिवार सुबह हुई बात
विनित चांदना ने बताया कि दोनों भाई दोस्त की तरह रहते हैं। सुधीर दिल्ली में ही रहते हैं। बीचबीच में उनका हिसार आना होता है। शनिवार की सुबह ही उन्होंने फोन कर बताया था कि उनकी मेहनत सफल हो गई है। उनकी दवा को मंजूरी मिलने जा रही है। शाम को घोषणा के बाद बातचीत नहीं हो सकी है। उनका मैसेज आया है कि वापस कॉल करेंगे।
अप्रैल 2020 से लगे थे रिसर्च में
अमर उजाला से बातचीत में विनित चांदना ने बताया कि अप्रैल 2020 से सुधीर कोरोना की दवा पर काम कर रहे थे। रिसर्च के दौरान उनको कई बार मायूसी भी मिली। इसके बाद हम उनका हौसला बढ़ाते थे।