मैदान में लड़कियों को फुटबॉल खेलता देख मिली प्रेरणा
काजल ने बताया कि उन्होंने छठी कक्षा से फुटबॉल की शुरुआत की थी। काजल बताती हैं कि जब वह स्कूल में पढ़ने जाती थी तो सुबह-शाम स्कूल के मैदान में लड़कियों को फुटबॉल खेलता देखती थी। इस दौरान काजल के मन में भी ख्याल आया कि क्या वह भी फुटबॉल में अपना भविष्य बना सकती है। फिर काजल ने फुटबॉल खेलने की इच्छा अपने माता-पिता को बताई तो उन्होंने बेटी को फुटबॉल खेलने के लिए स्कूल मैदान में भेजना शुरू कर दिया।
पिता ने बड़ी बेटी को भी बनाया नेशनल मेडलिस्ट फुटबॉलर
काजल के परिवार की आर्थिक हालत दयनीय है। पिता रामभूल ने दूसरों के खेतों में काम कर दोनों बेटियों को नेशनल फुटबॉलर बना दिया है। काजल ने बताया कि जब भी उन्हें समय मिलता है तो वह खेत के काम में अपने माता-पिता के साथ हाथ बंटवाती है। वहीं माता रानी गृहिणी हैं। काजल का कहना है कि उनका सपना फुटबॉल विश्व कप में स्वर्ण पदक जीतना है। इसके लिए वह शिविर में दिनरात मेहनत करेगी।
काजल की उपलब्धियां
- अंडर-17 खेलो इंडिया में स्वर्ण पदक
- अंडर-17 स्कूली नेशनल प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक
- अंडर-14 में स्कूली नेशनल में स्वर्ण पदक
- अंडर-17 में नेशनल ऊर्जा कप में रजत पदक