बड़ी उड़ान से पहले हिसार एयरपोर्ट से छोटी उड़ान बंद हो गई है। पिछले छह महीने से हिसार फ्लाइंग एविएशन क्लब पर ताला लगा हुआ है। लाइसेंस रिन्यू न होने के कारण यहां से कोई फ्लाइंग नहीं कराई जा रही। हिसार की इन छोटी उड़ानों को फिलहाल अनुमति का इंतजार है। डायरेक्टर जनरल आफ सिविल एविएशन की ओर से हिसार में करीब तीन दशक पहले फ्लाइंग क्लब स्थापित किया गया था, जिसमें युवाओं को कॉमर्शियल पायलेट की ट्रेनिंग दी जाती है। हिसार में इसके लिए 15 सीटें तय हैं। फ्लाइंग क्लब की ओर से 200 घंटे के उड़ान प्रशिक्षण के लिए 22 लाख रुपये फीस तय है। कॉमर्शियल पायलेट लाइसेंस के लिए औसतन 10 हजार रुपये प्रति घंटा की फीस है। इस तरह का प्रशिक्षण देने के लिए यहां दो मिनी एयर क्राफ्ट हैं। कैसीना 172 चार सीट और कैसीना 152 दो सीट वाला क्राफ्ट है।
जनवरी 2016 के बाद यह एयरक्राफ्ट कोई उड़ान नहीं भर पाए हैं। दरअसल पांच साल के बाद चीफ फ्लाइंग ऑफिसर के लाइसेंस रिन्यू किए जाते हैं। जनवरी 2016 में सीएफओ के लाइसेंस रिन्यू करने के लिए डीजीसीए में भेजे गए थे। अब तक लाइसेंस रिन्यू नहीं किए गए हैं, जिस कारण यहां फ्लाइंग एक्टिविटी पूरी तरह से बंद हैं।
चरणबद्ध तरीके से बनेगा इंटरनेशनल एयरपोर्ट
हिसार की हवाई पट्टी को इंटरनेशनल एयरपोर्ट के तौर पर विकसित करने का एलान सीएम कई बार कर चुके हैं, जिसमें चरणबद्ध तरीके से काम किया जाएगा। पहले चरण में हवाई पट्टी को 4000 फीट से बढ़ाकर 7000 फीट किया जाना है। इसके बाद यहां नाइट लैंडिंग फैसिलिटी शुरू की जाएगी। इस साल एयरपोर्ट विकास के लिए प्रदेश सरकार की ओर से करीब 50 करोड़ के बजट का एलान किया गया है।
जमीन नहीं बनेगी रोड़ा
हिसार एयरोड्रम के लिए 194 एकड़ जमीन दी हुई है। यहां एयरपोर्ट विकसित करने के लिए करीब 3500 एकड़ जमीन देने का प्रस्ताव है। एयरोड्रम के चारों ओर सरकारी विभागों की जमीन उपलब्ध है। ऐसे में इसके विकास के लिए जमीन अधिग्रहण बड़ा मुद्दा नहीं होगा।
लाइसेंस रिन्यू होने के लिए भेेजे गए हैं। इस कारण पिछले कुछ महीने से फ्लाइंग नहीं हो पा रही। जब लाइसेंस रिन्यू हो जाएंगे तो फिर से फ्लाइंग शुरू करा दी जाएगी। डीजीसीए की ओर से लाइसेंस रिन्यू होने का इंतजार है।
- कैप्टन डीके पूनिया, फ्लाइंग ऑफिसर हिसार