किसान की अंतिम यात्रा में भाग लेते किसान।
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प्रदेश के सबसे बड़े गांव सिसाय कालीरामण के सवा एकड़ के किसान 47 वर्षीय राजबीर की आत्महत्या के बाद उसका परिवार पूरी तरह से बिखर गया। बेटी पिंकी को पढ़ा-लिखा कर अधिकारी बनाकर उसकी अच्छे परिवार में शादी करना चाहता था। उसकी मौत के बाद बेटी का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं 21 वर्षीय बेटे मनजीत के कंधों पर परिवार की जिम्मेवारी डाल गया, जिसकी दो महीने पहले शादी की थी। किसान की मौत ने परिवार को पूरी तरह से बिखेर कर रख दिया। राजबीर परिवार में एकमात्र कमाने वाला था।
पूरे गांव में हादसे की सूचना मिलते ही मातम छा गया। किसान की मौत से गांव में सन्नाटा पसरा रहा। गांव के लोगों ने कहा किसान की शहादत बेकार नही जाएगी। अब गांव की 36 बिरादरी के लोग पहले से भी ज्यादा बढ़-चढ़कर किसान आंदोलन में भाग लेंगे। किसान की अंतिम यात्रा में पूर्व विधायक रामभगत शर्मा, इनेलो के जिला प्रधान सतबीर सिसाय, विकास सीसर, दलजीत सिहाग, पूर्व सरपंच अजीत सिंह, मुकेश लोहान, जोगेंद्र नैन, सत्यवीर पूनिया, कुलदीप खरड़, शमशेर लाडवा, मनदीप नाथवान, सुभाष रामायण सहित सैकड़ों किसानों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।
आठवीं तक पढ़ा था राजबीर
किसान राजबीर ने आठवीं कक्षा तक पढ़ाई की थी और वह पढ़ाई की अहमियत को समझते हुए बेटी को पढ़ा-लिखा कर एक ऑफिसर बनाना चाहता था। बेटी ने बीएससी की पढ़ाई कर ली और वह आगे पढ़ना चाहती हैं। बेटी पिंकी ने कहा कि अब पिता की मौत के साथ ही उसके सारे सपने बिखर गए।
26 फरवरी को गया था टीकरी बॉर्डर पर
किसान राजबीर के पास केवल सवा एकड़ जमीन है। इसी जमीन पर दिन रात मेहनत कर वह अपने परिवार का पेट पाल रहा था। 26 फरवरी को राजबीर टीकरी बॉर्डर पर गया था।