जीजेयू की लापरवाही के कारण एनिमल हाउस में रिसर्च के लिए रखे गए 200 से अधिक चूहों की गर्मी के कारण मौत हो गई। इससे शोध करने वाले विद्यार्थियों की रिसर्च प्रभावित हो रही है। इन चूहों को 24 घंटे वातानुकूलित हाउस यानी 22 से 25 डिग्री तापमान की जरूरत होती है, लेकिन जीजेयू प्रशासन की अनदेखी के चलते एसी में आई तकनीकी खामी के कारण 200 से अधिक चूहों की मौत हो गई। बताया गया कि एसी दो घंटे चलने के बाद अपने आप बंद हो जाते, जिसके बाद दोबारा एसी चालू करने वाला रात को कोई नहीं होता।
इन चूहों के लिए होते हैं ऑलवेदर एसी
इन चूहों पर ड्रग्स आदि का परीक्षण किया जाता है। इसलिए इन चूहों को कोई भी बीमारी नहीं होनी चाहिए। बीमारी और संक्रमण से बचाने के लिए इन चूहों का एक निर्धारित तापमान वाले कमरे में रखरखाव किया जाता है। इसके लिए ऑल वेदर एसी की जरूरत होती है। जिस हाउस में इनको रखा जाता है, वहां कोई भी अन्य जीव प्रवेश नहीं कर सकता। इससे उन्हें संक्रमण का खतरा रहता है। जीजेयू के एनिमल हाउस में विस्टरा रैट्स, माइस के अलावा खरगोश, गिनी पिग्स आदि को भी रिसर्च के लिए रखा जाता है।
इन स्पेशल चूहों पर होते हैं शोध
इन चूहों पर ब्रेन, एल्जाइमर, स्मरण शक्ति, डायबिटीज, सर्जरी आदि को लेकर रिसर्च की जाती है। एम फॉर्मा के विद्यार्थी और बायो टेक्नोलॉजी, नैनो टेक्नोलॉजी व फार्मेसी के रिसर्च स्कॉलर इन स्पेशल चूहों पर शोध करते हैं। बड़े चूहों को विस्टारा रैट तथा छोटी चुहिया को माइस कहा जाता है। लुवास विश्वविद्यालय से खरीदे जाने वाले विस्टारा रेट की कीमत 150 रुपये तथा माइस की किमत 75 रुपये होती है।
रिसर्च के लिए कमेटी देती है अनुमति
रिसर्च के लिए चूहों सहित अन्य छोटे जानवरों को खरीदने के लिए विद्यार्थियों को आईएईसी यानि इंस्टीट्यूशनल एनिमल एथिकल कमेटी से अनुमति लेनी पड़ती है।
एक रिसर्चर छात्रा के 55 चूहों की मौत
जीजेयू की एक रिसर्चर छात्रा को आईएईसी ने उसके प्रोजेक्ट पर 92 चूहों पर रिसर्च करने की अनुमति दी थी। छात्रा की रिसर्च इन चूहों पर चल रही थी। लेकिन गर्मी के कारण इन 92 चूहों में से 55 चूहे अब तक दम तोड़ चुके हैं।
जीजेयू प्रशासन की ये भी खामियां
एनिमल हाउस में रखे जाने वाले इन चूहों को एसी में रखना तो जरूरी है ही। इसके साथ ही इनके खाने तथा बेडिंग का भी विशेष ध्यान रखना पड़ता है। इसके लिए एनिमल हाउस में अटेंडेंट का होना जरूरी है जो जानवरों के खानपान व रख रखाव का ध्यान रख सके। लेकिन जीजेयू में बदतर हालात के चलते रिसर्चर को ही अपने चूूहों का ख्याल रखना पड़ता है। खाना खिलाने से लेकर उनकी बेडिंग, साफ-सफाई तक सारा काम खुद ही करना पड़ता है। जबकि एनिमल हाउस के लिए जीजेयू में जरूरत के मुताबिक 24 घंटे अटेंडेंट का होना जरूरी है।
ऐसी स्थित में संबंधित विभाग को गंभीरता से संज्ञान लेना चाहिए। जीजेयू प्रशासन को एथिकल कमेटी की इमरजेेंसी मीटिंग बुलानी चाहिए। ताकि विद्यार्थी अपनी रिसर्च पर फोकस कर उसे पूरी कर सके।
- डॉ. पीके कपूर, वरिष्ठ वैज्ञानिक, लुवास
मेरे पास इस तरह की कोई शिकायत नहीं आई है। मामले की जांच करेंगे। एथिकल कमेटी की मीटिंग की जरूरत पड़ेगी तो हम इमरजेंसी मीटिंग बुलवाएंगे।
- प्रो. टंकेश्वर कुमार, कुलपति, जीजेयू