सभी केंद्रीय ट्रेड यूनियनों व कर्मचारी संगठनों के आह्वान वीरवार को सरकार की मजदूर व कर्मचारी विरोधी नीतियों के खिलाफ व मांगों को लेकर मजदूरों व कर्मचारियों ने क्रांतिमान पार्क से लेकर लघुसचिवालय तक प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का नेतृत्व सीटू नेता देशराज, एआईयूटीयूसी के का. हवा सिंह संघर्ष, इंटक नेता जयप्रकाश, एटक नेता का. रूप सिंह, सकसं के जिला प्रधान सुरेंद्रमान, हरियाणा कर्मचारी महासंघ के जिला प्रधान जय भगवान बडाला ने संयुक्त रूप से किया।
प्रदर्शन का संचालन सीटू नेता मोहनलाल राजली व सकसं नेता अशोक सैनी ने किया। प्रदर्शन के बाद मांगों को लेकर प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन उपायुक्त को सौंपा गया।
इससे पूर्व क्रांतिमान पार्क में एकत्रित हुए मजदूरों व कर्मचारियों को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि केंद्र व प्रदेश की भाजपा सरकार ने चुनाव में आम जनता के साथ-साथ कर्मचारियों व मजदूरों को अनेक वादे किए, लेकिन सत्ता में आने के बाद
सरकार कर्मचारी विरोधी फैसले ले रही है। इसी प्रकार मजदूरों व कर्मचारियों के हितों की अनदेखी कर फैसले लिए जा रहे हैं।
इनके चलते मजदूरों की स्थिति मालिकों के हाथों में गुलामों जैसी हो जाएगी। ठेकेदारी, आउट सोर्सिंग व निजीकरण की नीतियों के माध्यम से सरकार द्वारा कच्चे कर्मचारियों का शोषण करवाया जा रहा है। उद्योगों को बढ़ावा देने के नाम मजदूरों के जायज व न्यायोचित जनतांत्रिक अधिकार छीने जा रहे हैं।
ईएसआई व पीएफ जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का विस्तार करने की बजाय उनको समेटा जा रहा है। सरकारी व निजी क्षेत्र में स्थाई नौकरी खत्म की जा रही हैं। इसके चलते मजदूरों व कर्मचारियों के सामने इन सरकार नीतियों का विरोध करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। उन्होंने सरकार से मजदूर व कर्मचारी विरोधी नीतियों को वापस लेने की मांग की और जनता के हितों को देखते हुए फैसले लेने की मांग की।
प्रदर्शन को एआईयूटीयूसी के जिला सचिव का. मेहर सिंह, सीटू राज्य उपाध्यक्ष आरसी जग्गा, एटक नेता का. रूप सिंह, हरियाणा कर्मचारी महासंघ के नेता वेदप्रकाश शर्मा, एटक के एमएल सहगल, सकसं के किजला सचिव अनिल शर्मा, पैक कर्मचारी फेडरेशन के जिला प्रधान बीएल शर्मा, इंटक नेता कृष्ण कुमार, सीटू नेता देशराज आदि ने भी संबोधित किया।
ज्ञापन में ये की गई मांगें:-
1. महंगाई पर रोक लगाई जाए।
2. श्रम कानूनों में बदलाव करने की बजाय उनको सख्ती से लागू किया जाए।
3. ठेकेदारी प्रथा, निजीकरण व आउट सोर्सिंग की नीतियों को बंद किया जाए।
4. केंद्र व हरियाणा में न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपए किया जाए।
5. व्यापक स्तर पर पेंशन योजना तैयार कर उसमें सभी को शामिल किया जाए।
6. असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा योजना के अंतर्गत लाया जाए।
7. सड़क परिवहन सुरक्षा विधेयक व बिजली नियामक विधेयक वापस लिया जाए।
8. मुनाफा कमाने वाले सार्वजनिक क्षेत्रों के निजीकरण व विनिवेशीकरण पर रोक लगाई जाए।
9. रेलवे, रक्षा, बीमा, वित्त, बैंक व खुदरा बाजार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश बंद किया जाए।
10. स्कीम कर्मचारियों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।
11. कर्मचारी भविष्य निधि कोष से मजदूरों द्वारा मालिकों के अंशदान निकालने पर लगाई गई रोक को वापस लिया जाए।
12. हरियाणा में मजदूरों के जनतांत्रिक अधिकारों पर हो रहे हमले बंद किए जाएं।
13. हरियाणा रोडवेज के किसी भी प्रकार के निजीकरण पर रोक लगाई जाए।