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साहब! प्रशासन की नाकामी से जल गए हमारे आशियाने

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जाट आंदोलन - फोटो : Bureau
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जाट आरक्षण के दौरान जातीय हिंसा की जांच करने मंगलवार को यहां पहुंची प्रकाश सिंह कमेटी के सामने पीड़ितों का टारगेट उपायुक्त डॉ. चंद्रशेखर रहे। ढाणी पाल में पीड़ितों की प्रकाश सिंह के सामने ही उपायुक्त से बहस हो गई, जिसे मुश्किल से शांत किया गया। भाईजी ढाबा पर भी व्यापारियों ने उन्हें खरी-खरी सुनाई। यहां बीच में बोलने की कोशिश कर रहे डीसी डॉ. चंद्रशेखर खरे को एडिशनल चीफ सेक्रेटरी विजयवर्धन ने चुप रहने की नसीहत दे डाली। वहीं जगाबाड़ में पीड़ितों ने कहा कि अगर पुलिस नहीं आती, तो उनके आशियाने बच जाते।
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लोगों ने यहां तक आरोप लगा डाले कि पुलिस आने के बाद ही उनके मकानों को जलाया गया है। प्रकाश सिंह जांच कमेटी ने अधिकांश जगहों पर लोगों से पूछा कि क्या पुलिस वक्त पर आ गई थी। जगाबाड़ा के लोगों को छोड़ कर सभी ने कहा नहीं। जगबाड़ा के लोगों ने कहा कि जी, पुलिस के आने के बाद ही सब कुछ हुआ है।

उन्होंने एक डीएसपी तथा इंस्पेक्टर का बाकायदा नाम लेते हुए कहा कि उनके यहां पहुंचने के बाद ही उपद्रवियों को इशारा कर उनके आशियाने जलाने की खुली छूट दी गई। उनका आरोप था कि पुलिस तथा प्रशासन ने उपद्रवियों को रोकने के लिए कोई प्रयास नहीं किया।
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ढाणी पाल में उस वक्त स्थिति नाजुक हो गई जब गुर्जर समाज के पीड़ितों ने कमेटी के साथ पहुंचे उपायुक्त डॉ. चंद्रशेखर खरे को ही खरी-खरी सुनानी शुरू कर दी। सतपाल गुर्जर ने कहा कि डीसी साहब, आपने पहले भी मिस गाइड किया है और अब कमेटी को भी मिस गाइड कर रहे हो। वे यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा कि प्रशासन की वजह से आज उनके घर भूतिया महल बने हुए हैं। गुस्साएं ग्रामीण बोले, डीसी साहब आप शहर में सद्भावना मीटिंग कर रहे थे, वहां भी आपको जानकारी दी गई थी। आपको बताया गया था घटना घटने वाली है तथा गोली चलने वाली है। आमने सामने खड़े हैं। डीसी साहब आपने कोई एक्शन नहीं लिया।

‘लेट हिम स्पीक मिस्टर चंद्रशेखर’
भाईजी ढाबा पर जब व्यापारी नेता प्रवीन तायल प्रशासन की गैर जिम्मेदाराना हरकतों के बारे में कमेटी को बता रहे थे तो इसी दौरान उपायुक्त डॉ. चंद्रशेखर खरे बीच में बोलने लगे। वे अभी बोले ही थे कि मौके पर खड़े एडिशनल चीफ सेक्रेटरी विजयवर्धन ने उन्हें रोक दिया। विजयवर्धन ने फटकारते हुए कहा, लेट हिम स्पीक मिस्टर चंद्रशेखर। इतना कहते ही उपायुक्त ने चुप्पी साध ली। प्रवीन तायल ने उपायुक्त से कहा कि आपका ड्यूटि मजिस्ट्रेट यहां था लेकिन क्यों नहीं लाठी चार्ज के ऑर्डर दिए गए। क्या डरते थे या फिर उनकी शह थी? उन्होंने कमेटी को वो सीसीटीवी कैमरे की वीडियो फुटेज भी सौंपी जिसमें पुलिस उपद्रवियों के आगे भागती नजर आ रही है तथा ड्यूटि मजिस्ट्रेट की गाड़ी भी उनमें शामिल है।

पंजाबी, बनिया व जाट को छोड़ कर सभी थे
शहनाई मैरिज पैलेस के स्वामी से जब जांच कमेटी ने पूछा कि आग लगाने वाले कौन थे तो जयसिंह सिहाग ने कहा कि जनाब पंजाबी, बनिया तथा जाट को छोड़ कर सभी जातियों के लोग थे। कमेटी ने उनसे पूछा किया आप कहां थे तो जयसिंह ने कहा कि वे मैरिज पैलेस में बने अपने आवास में था तथा डर के मारे अपने बच्चों को लेकर प्रथम मंजिल पर बने कमरे को कुंडी लगा कर बंद कर दिया था।

हाथ जोड़ कर बचाई जान
हिंदू स्कूल के संचालक अनिल कुमार ने कहा कि उन्होंने हाथ जोड़ कर अपनी जान बचाई। उपद्रवियों की संख्या ज्यादा थी लिहाजा वे कुछ नहीं कर सकते थे। एक बार नहीं उपद्रवियों ने उनके स्कूल पर तीन बार आगजनी की लेकिन पुलिस ने हमेशा कोताही बरती।

पूर्व मंत्री सैनी ने भी की मुलाकात
पूर्व मंत्री अत्तर सिंह सैनी ने भी प्रकाश सिंह कमेटी से मुलाकात कर अपने बयान दर्ज करवाए। इस दौरान कई पुलिस अधिकारियों के नाम भी उन्हें सौंपे गए हैं। सैनी ने कहा कि घटना के जिम्मेदार पुलिस अफसरों तथा प्रशासन के अलावा पीड़ितों को मुआवजे की मांग की गई है।

भाजपा नेताओं ने भी प्रशासन की मुखालफत
भाजपा के वरिष्ठ नेता राजेश ठकराल, मामनराम सैनी तथा अन्य ने भी कमेटी से मुलाकात कर प्रशासन तथा पुलिस की खुले तौर पर मुखालफत की है। उन्होंने इस हिंसा के लिए उन्हें कटघरे में खड़ा किया है। वहीं इतिहासकार जगदीश सैनी ने भी शहर की फिजा बिगाड़ने में पुलिस तथा प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया।

अपनों की पैरवी के लिए भी हुई लॉबिंग खास बात यह भी रही कि कटघरे में आए कई पुलिस अधिकारियों ने अपने नुमाइंदे तैयार कर कमेटी के सामने पेश किए। जिन लोगों का हिंसा से दूर का वास्ता नहीं था वे भी उनकी पैरवी करने यहां पहुंचे थे कि पुलिस तथा प्रशासन ने बेहतरीन कार्य किया है।
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