मात्र दो साल की उम्र में पिता का उठा साया। मां सहित नौ भाई-बहन। किराये का मकान। आर्थिक तंगी के चलते खाने तक के लिए पैसे नहीं। भूखे रहकर भी कुश्ती में पदक जीतना उसके लिए रेत से तेल निकालने से कम नहीं था। इन सब परेशानियों को धोबी पछाड़ मारते हुए उसने एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड जीता।
संघर्ष भरी यह कहानी हिसार की कुश्ती खिलाड़ी सुमन कायत की है। सुमन के घर के आर्थिक हालात इतने खराब थे कि अगर उनके घर एक समय खाना बन गया, तो शाम के समय खाना बनाने के लिए भी पैसे नहीं होते थे। इसके बावजूद सुमन ने अपने पक्के इरादों के चलते भूखे रहकर भी कुश्ती के अभ्यास को नहीं छोड़ा। इसी जुनून ने उसे अंतरराष्ट्रीय रेसलर तो बनाया और सरकारी नौकरी भी दिलवाई।
दो साल की उम्र में ही खो दिया था पिता
मूलत: भिवानी के गांव जताई की रहने वाली सुमन के जीवन में पग-पग पर संघर्ष था। जब वे दो साल की थीं तो पिता की मौत हो गई। सुमन के परिवार में उसकी मां और 9 भाई-बहन थे। ऐसे में उसकी अनपढ़ मां ने मेहनत-मजदूरी करके उनका पालन-पोषण किया।
टीचर ने पहचाना हुनर, हिसार आकर किया अभ्यास
सुमन 7वीं कक्षा में हुई तो उसके टीचर विरेंद्र ने हुनर को पहचान लिया। कोच ने कहा कि कुश्ती की खिलाड़ी बनोगी। सुमन के हां करने पर टीचर ने हिसार के महाबीर स्टेडियम में कुश्ती के प्रशिक्षण के लिए भेजना शुरू कर दिया। सुमन को कुश्ती के अभ्यास के लिए हिसार रुकना पड़ा तो ऐसे में उसके बड़े भाई ने रामपुरा मोहल्ला में किराये का कमरा दिलवाया। इसके एक साल बाद सुमन की मां और उसके अन्य भाई-बहन भी हिसार आकर रहने लगे।
शियन चैंपियनशिप के लिए पांच लाख से खरीदी मकान की जमीन
सुमन ने बताया कि उनका परिवार शुरू से ही किराये पर रहा है, इसलिए जब एशियन में गोल्ड जीतने पर उसे पांच लाख की राशि मिली तो इस राशि से उन्होंने सबसे पहले खुद का मकान बनाने के लिए जमीन खरीदी। फिलहाल वो हिसार की श्याम विहार कॉलोनी में किराये पर रहते हैं।
कंधे में चोट लगी तो छोड़ी कुश्ती
सुमन को अपनी आखिरी प्रतियोगिताओं के दौरान बांए कंधे में चोट आई थी, लेकिन सुमन ने इस ओर अधिक ध्यान नहीं दिया। इसके चलते उसकी चोट ने धीरे-धीरे गंभीर रूप ले लिया और एक समय के बाद उसे कुश्ती छोड़नी पड़ी। वहीं पड़ोसियों के साथ पानी को लेकर हुए झगड़े में भी सुमन को कंधे में चोट आई थी। सुमन अभी भी पढ़ाई कर रही हैं।
सुमन की उपलब्धियां
- वर्ष 2007 में जूनियर नेशनल में गोल्ड मेडल।
- वर्ष 2008 में जूनियर नेशनल में गोल्ड।
- वर्ष 2009 में जूनियर नेशनल में गोल्ड।
- वर्ष 2010 में नेशनल कैडिट चैंपियनशिप में गोल्ड।
- वर्ष 2010 में एशियन कैडिट चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल।
- वर्ष 2011 में जूनियर नेशनल में ब्रांज मेडल।